सरकार द्वारा घोषित नया डिजिटल क्रेडिट असेसमेंट मॉडल अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को ऋण प्राप्त करने में और अधिक सरलता, पारदर्शिता और गति प्रदान कर रहा है। केंद्रीय बजट 2024–25 में इस योजना की घोषणा की गई थी और वित्त मंत्री द्वारा इसे 6 मार्च 2025 को औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया।
यह मॉडल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को पारंपरिक मैनुअल मूल्यांकन के स्थान पर डिजिटल माध्यम से MSMEs की ऋण पात्रता तय करने की क्षमता प्रदान करता है। अब बैंक बाहरी एजेंसियों पर निर्भर न रहकर, उद्यमों की डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर स्वचालित और वस्तुनिष्ठ निर्णय ले सकेंगे।
कैसे काम करता है यह मॉडल?
इस मॉडल के तहत लोन की पूरी प्रक्रिया—आवेदन से लेकर स्वीकृति तक—डिजिटल माध्यम से पूरी होती है। इसमें पैन कार्ड सत्यापन (NSDL के माध्यम से), मोबाइल/ईमेल ओटीपी सत्यापन, जीएसटी डेटा, बैंक स्टेटमेंट (अकाउंट एग्रीगेटर से), आयकर रिटर्न, क्रेडिट ब्यूरो रिपोर्ट और धोखाधड़ी की जांच जैसी सेवाएं एपीआई के माध्यम से जुड़ी होती हैं।
अब MSME ऋण के लिए आवेदनकर्ता को बैंक ब्रांच जाने की आवश्यकता नहीं, बल्कि वह कहीं से भी ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। इससे दस्तावेज़ों की मात्रा घटती है, प्रक्रिया तेज होती है और ऋण का निर्णय अधिकतम एक दिन में मिल जाता है।
अब तक की प्रगति
1 अप्रैल से 15 जुलाई 2025 तक इस नए मॉडल के तहत 98,995 MSME ऋण आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है। यह परंपरागत प्रणाली की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी साबित हुआ है।
MSME को क्या लाभ मिलेगा?
- कहीं से भी आवेदन करने की सुविधा
- कागजी कार्यवाही और बैंक शाखा की यात्राओं में कमी
- डिजिटल माध्यम से त्वरित इन-प्रिंसिपल स्वीकृति
- ऑब्जेक्टिव डेटा पर आधारित ऋण निर्णय
- फ्रॉड और मानवीय त्रुटियों में कमी
- पारदर्शिता और ट्रैकिंग की सुविधा
बैंकों को क्या फायदा?
बैंकों का बिजनेस रूल इंजन (BRE) अब सभी जोखिमों को अपने क्रेडिट रिस्क पॉलिसी के अनुसार डिजिटल रूप से दर्ज करता है, जिससे मूल्यांकन अधिक सटीक और समयबद्ध बनता है।

