֍:कैसे कम हुए मामले?§ֆ:सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर बैन को लेकर सख्तीं, कानूनी कार्रवाई, रेड एंट्री जैसी सख्तीी, केंद्र और राज्यं सरकार की योजनाओं के साझा प्रयासों और पर्यावरण पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों को देखते हुए यहां के किसान पराली जलाने से बच रहे हैं. इस बार हरियाणा के कई जिले ऐसे हैं जहां एक भी मामला सामने नहीं आया है. वहीं, कुछ जिलों में नाम मात्र घटनाएं सामने आई हैं. इस वर्ष गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, मेवात, चरखी-दादरी, रेवाड़ी में पराली जलाने की एक भी घटना सामने नहीं आई है. वहीं, भिवानी में 7 और झज्जर में 11 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इसके उलट पंजाब में इस साल भी पराली जलाने की घटनाएं बड़ी संख्याझ में दर्ज की गई हैं. अकेले संगरूर जिले में 1,721 पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं. ये घटनाएं हरियाणा में दर्ज किए कुल मामलों से भी काफी ज्यादा हैं.§֍:किसान बरत रहे सावधानियां§ֆ:इस साल हरियाणा के किसानों ने सरकार के पराली प्रबंधन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है. फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सरकार किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये सब्सिडी देती है, जिसका लाभ लेने के लिए किसानों ने आवेदन दिए है. बता दें कि हरियाणा में 15 सितंबर 2024 से 24 नवंबर 2024 पराली जलाने की सबसे ज्यारदा घटनाएं जींद में 201, कैथल में 194, सिरसा में 147, कुरूक्षेत्र में 131 और फतेहाबाद में 129 सामने आई हैं.§पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में काफी दिनों से पराली जलाने के मामले सामने आ रहे थे. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और पंजाब सरकारों को फटकार भी लगाई थी. इस वजह से दिल्ली में वायु गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही थी और वायु प्रदूषण बढ़ गया था. अब हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में काफी ज्यादा गिरावट आई है. इसको लेकर हरियाणा राज्य कृषि आयोग ने पराली जलाने के आंकड़े जारी किए हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल 24 नवंबर तक पराली जलाने की 2278 घटनाएं सामने आई थीं. अब ये घटकर 1315 रह गई हैं.

