֍:कैसे काम करता है स्ट्रिकी ट्रैप§ֆ:येलो स्टिकी ट्रैप यानी पीला चिपचिपा जाल कीटों को पकड़ने और उनकी निगरानी करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक तरीका है. इसमें चिपचिपे गोंद से लगे कागज़ पर चमकीले पीले रंग का इस्तेमाल किया जाता है, जो कीटों को अपनी ओर खींच लेता है. जब कीट इस जाल के पास आता है, तो वह गोंद पर आकर चिपक जाता है. इससे पौधे कीटों से सुरक्षित रहते हैं.
§֍:इतना है दाम §ֆ:किसान रवि वर्मा ने बताया कि एक येलो स्ट्रिक की बाजार में कीमत लगभग 10-15 रुपए है. जिसे किसान खरीद कर अपने खेतों में लगे सब्जी और फल के पौधों को कीटों से बचा सकते हैं और यह येलो स्टिक ट्रैप बाजार में आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है.
§֍:नहीं है जहरीला पदार्थ §ֆ:यह गैर-ज़हरीला प्रोडक्ट है, जिसमें किसी भी प्रकार का कोई रासायनिक घटक नहीं होता है. यह सफ़ेद मक्खी, हरा तेल, एफ़िड्स, और लीफ़ माइनर जैसे कीटों को आकर्षित कर सकता है. इसे फसल की छतरी के ऊपर बांस के डंडों की मदद से लगाया जाता है और इसमें लगा हुआ गोंद दो से तीन महीने तक चिपचिपा बना रहता है.
§किसान खेतों में मुनाफा कमाने के लिए रात दिन मेहनत करते हैं, लेकिन विभिन्न प्रकार के कीट -रोग पौधे में लग जाते हैं. जिससे उसे काफी नुकसान झेलना पड़ता है. किसानों की चिंता को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने येलो स्ट्रिकी ट्रैप विकसित किया है. जिससे कीड़े पौधों में नहीं लगते. कीड़े सीधा उस ट्रैप में आकर चिपक जाते हैं. दरअसल यह ट्रैप कागज का एक टुकड़ा होता है. जिसका साइज लगभग 3 इंच चौड़ा और 5 इंच ऊंचा होता है. इसमें गोंद जैसा चिपचिपा पदार्थ लगा होता है. जो पौधों में लगने वाले कीड़ों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेता है और पौधों को नुकसान होने से बचाया जा सकता है. येलो स्ट्रिकी ट्रैप स्थानीय स्पाट और वयस्क कीटों के फसलों में प्रवास की अवधि और जिस प्रमुख दिशा से वे आ रहे हैं उनको इंगित कर सकते हैं.

