ֆ:इस सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने किया। उन्होंने इसे ‘विकसित भारत’ के विजन से जुड़ी एक परिवर्तनकारी पहल बताया और बिहार की कृषि विरासत, संसाधन क्षमता और युवाओं की ऊर्जा को राज्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की कुंजी बताया।सम्मेलन में 20 देशों से आए 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार, भारत के विभिन्न राज्यों से 50 घरेलू और 20 संस्थागत खरीदार शामिल हुए। 500 से अधिक बी2बी बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें मखाना, शाही लीची, जर्दालु आम और कतर्नी चावल जैसे GI टैग प्राप्त उत्पादों के लिए निर्यात की मजबूत संभावनाएं बनीं।§ֆ:पश्चिम अफ्रीकी खरीदारों ने ‘सत्तू’ जैसे उच्च प्रोटीन वाले पारंपरिक उत्पादों में रुचि दिखाई, जबकि सिंगापुर की कंपनियों ने लीची और आम की आपूर्ति में रुचि जताई। कुछ एयरलाइन और रेलवे कैटरिंग कंपनियों ने बिहार के कृषि उत्पादों को भोजन में शामिल करने की संभावनाएं तलाशी। इस कार्यक्रम की एक प्रमुख उपलब्धि APEDA, बिहार सरकार और यूएई की लुलु ग्रुप के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर था, जिसका उद्देश्य बिहार की लीची के शेल्फ लाइफ को बेहतर बनाकर निर्यात को बढ़ावा देना है।§ֆ:सम्मेलन के दौरान, विशेषज्ञों द्वारा निर्यात की तैयारी, उन्नत पैकेजिंग, सर्टिफिकेशन और स्टार्टअप को औपचारिक रूप देने जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए। MoFPI द्वारा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) जैसे प्रमुख योजनाओं को भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें बिहार वित्तीय वर्ष 2025 में सर्वाधिक स्वीकृत इकाइयों वाला राज्य रहा।§ֆ:सम्मेलन में 120 से अधिक प्रदर्शकों की भागीदारी रही, जिसमें एफपीओ, महिला स्वयं सहायता समूह, राष्ट्रीय ब्रांड और संभावित निर्यातक शामिल थे, जिसने बिहार की कृषि-खाद्य क्षमताओं को वैश्विक मंच पर उभरने का अवसर दिया। IBSM की सफलता से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र और राज्य सरकार के तालमेल, विभिन्न एजेंसियों के समन्वय और स्थानीय नवाचारों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के प्रयास बिहार को भारत के “ग्लोबल फूड बास्केट” बनाने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।§केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने बिहार सरकार, एपीडा (APEDA) और ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (TPCI) के सहयोग से पटना के ज्ञान भवन में दो दिवसीय पहले इंटरनेशनल बायर-सेलर मीट (IBSM) का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम बिहार के कृषि-खाद्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, जिसने राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ा।

