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Home कृषि समाचार

बिहार: किसानों के लिए खुशखबरी अब धान की फसलों को नहीं लगेगा भूरा धब्बा रोग, ये है बचाव का सही तरीका

Fiza by Fiza
August 13, 2025
in कृषि समाचार
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बिहार: किसानों के लिए खुशखबरी अब धान की फसलों को नहीं लगेगा भूरा धब्बा रोग, ये है बचाव का सही तरीका
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बिहार के किसानों ने पारंपरिक धान रोपाई के तरीके को बदलते हुए सीधी बुआई (Direct Seeding of Rice – DSR) तकनीक अपनाना शुरू कर दिया है। यह नई विधि किसानों के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित हो रही है। इस तकनीक में धान के बीजों को सीधे खेत में बोया जाता है, जिससे नर्सरी तैयार करने और रोपाई की प्रक्रिया से छुटकारा मिल जाता है।

सीधी बुआई तकनीक के प्रमुख लाभ:

  • पारंपरिक विधि की तुलना में प्रति हेक्टेयर लगभग 12,500 रुपये की बचत

  • मजदूरी और समय की बचत

  • पानी की खपत में कमी (पारंपरिक विधि से 18% तक कम पानी की आवश्यकता) 

  • फसल की देखभाल में आसानी

उभरती चुनौती: भूरा धब्बा रोग

हालांकि, इस नई तकनीक के साथ एक गंभीर समस्या सामने आई है – भूरा धब्बा रोग। यह रोग बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से फैल रहा है और धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

रोग के कारण

कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव श्रीवास्तव के अनुसार, इस रोग के प्रमुख कारण हैं:

  • गलत उर्वरक प्रबंधन: संतुलित मात्रा में पोषक तत्व न देना

  • पानी की कमी: समय पर सिंचाई न कर पाना

  • फसल चक्र का अभाव: लगातार एक ही फसल उगाना

  • बीज उपचार न करना: रोगरोधी क्षमता का अभाव

  • अत्यधिक नाइट्रोजन का प्रयोग: पौधों को रोग के प्रति संवेदनशील बनाना

रोग के लक्षण

भूरा धब्बा रोग की पहचान निम्नलिखित लक्षणों से की जा सकती है:

  • पत्तियों पर भूरे, गोल या अनियमित आकार के धब्बे

  • धब्बों के चारों ओर पीला घेरा

  • रोग बढ़ने पर धब्बे तने और फूलों तक फैलना

  • पौधों का सूखना और दानों का कम भरना

रोग का प्रभाव

अगर समय रहते इस रोग पर नियंत्रण न किया जाए तो:

  • फसल की उत्पादकता में 20-40% तक की गिरावट

  • पौधों की वृद्धि रुक जाती है

  • दाने पूरी तरह नहीं बन पाते

  • कभी-कभी पूरी फसल नष्ट होने का खतरा

रोकथाम और नियंत्रण के उपाय

किसान निम्नलिखित उपायों को अपनाकर इस रोग से निपट सकते हैं:

1. फफूंदनाशकों का प्रयोग

  • कार्बेन्डाजिम आधारित फंगीसाइड (1 मिली/लीटर पानी)

  • डाइथेन एम-45 (2 मिली/लीटर पानी)

  • छिड़काव सुबह या शाम के समय करें

  • 7-10 दिन के अंतराल पर दोहराएं 

2. जैविक नियंत्रण

  • नीम का अर्क

  • गौमूत्र आधारित जैविक फंगीसाइड

  • ट्राइकोडर्मा फफूंद का प्रयोग

3. निवारक उपाय

  • खेत की नियमित निगरानी

  • समय पर सिंचाई

  • संतुलित उर्वरक प्रबंधन (NPK का सही अनुपात)

  • फसल चक्र अपनाना

  • प्रमाणित बीजों का उपयोग 

सरकारी सहायता और भविष्य की रणनीति

बिहार सरकार किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सीधी बुआई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कृषि यंत्रों पर 50% तक की सब्सिडी दी जा रही है 12। कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को इस रोग से निपटने के लिए नियमित प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।

भविष्य में इस समस्या से निपटने के लिए:

  • रोगरोधी किस्मों (जैसे स्वर्ण सब-1, IR 64) का विकास और प्रसार 

  • जैविक खेती को बढ़ावा

  • जल प्रबंधन में सुधार

  • किसान शिक्षा कार्यक्रमों का विस्तार

बिहार में धान की खेती के तरीके में आ रहा यह बदलाव किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है, बशर्ते वे नई चुनौतियों के प्रति सजग रहें। भूरा धब्बा रोग जैसी समस्याओं से निपटने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान न केवल अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि उत्पादन में भी वृद्धि कर सकते हैं। सरकार, वैज्ञानिकों और किसानों के सामूहिक प्रयास से बिहार की धान खेती नई ऊंचाइयों को छू सकती है।

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