ֆ:§֍:किसानों की भाषा में बात ज़रूरी§ֆ:विजय सिन्हा ने अधिकारियों से अपील की है कि वे किसानों के साथ संवाद करते समय जटिल तकनीकी शब्दों के बजाय रोज़मर्रा की सरल हिन्दी का उपयोग करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रबी फसलें जो आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती हैं और मार्च-अप्रैल में काटी जाती हैं, उन्हें “बासंतीय फसल” कहा जाना चाहिए। इसी तरह, खरीफ फसलें जो जून-जुलाई में बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर में तैयार होती हैं, उन्हें “शारदीय फसल” कहें, क्योंकि इनका कटाई समय शरद ऋतु में आता है।§֍:मखाना को बताया “मां का खाना”§ֆ:पटना में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय मखाना संगोष्ठी में विजय सिन्हा ने मखाना की अहमियत को रेखांकित करते हुए उसे “मां का खाना” बताया। उन्होंने कहा कि मखाना न केवल स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि इससे हजारों किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है। राज्य सरकार द्वारा घोषित मखाना बोर्ड के माध्यम से अब तक लगभग 50,000 मखाना उत्पादक किसानों को सीधे ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका सकारात्मक असर दिखने लगा है।§֍:खेती को बना रहे हैं उद्यम§ֆ:डिप्टी सीएम ने ट्वीट कर कहा, “बिहार की उर्वर भूमि, हमारे कर्मठ किसान और डबल इंजन सरकार की दूरदर्शी नीतियों के समन्वय से खेतों में हरियाली और गांवों में समृद्धि का नया इतिहास लिखा जा रहा है। यह महाअभियान केवल खेती का अभियान नहीं है, बल्कि किसानों को अन्नदाता से उद्यमी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
उन्होंने अधिकारियों को खरीफ सीजन की तैयारी के लिए बीज, उर्वरक, सिंचाई और कृषि यंत्रों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।
§बिहार के उप-मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे किसानों से संवाद करते समय तकनीकी शब्दों की बजाय सरल और प्रचलित हिन्दी शब्दों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि रबी फसलों को “बासंतीय फसल” और खरीफ फसलों को “शारदीय फसल” कहा जाए, ताकि किसान मौसम के अनुसार इन फसलों को बेहतर समझ सकें। पटना में आयोजित “खरीफ महाअभियान 2025” कार्यशाला और समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम ने यह सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खेती को टिकाऊ बनाने और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

