֍:इन उपायों पर गौर करें किसान§ֆ:कुछ अन्य उपायों की बात करें तो पाले से बचाव के लिए खेत के चारों ओर मेड़ पर पेड़ और झाड़ियों की बाड़ लगा दी जाती है, जिससे शीतलहर द्वारा होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है. अगर खेत के चारों ओर मेड़ पर पेड़ों की पंक्ति लगाना संभव न हो, तो कम से कम उत्तर-पश्चिम दिशा में जरूर पेड़ की पंक्ति लगानी चाहिए. यह इसी दिशा में आने वाली शीतलहर को रोकने का काम करेगी.
पेड़ों की पंक्ति की ऊंचाई जितनी अधिक होगी, शीतलहर से सुरक्षा उसी के अनुपात में बढ़ती जाती है. पेड़ की ऊंचाई के चार गुना दूरी तक जिधर से शीतलहर आ रही है और पेड़ की ऊंचाई के 25-30 गुना दूरी तक जिधर शीतलहर की हवा जा रही है, पौधे लगाए जाएंगे तो फसल सुरक्षित रहती है. इसके अलावा पपीता और आम के छोटे पेड़ को प्लास्टिक से बनी क्लोच से बचाया जा सकता है. इस तरह का प्रयोग अपने देश में प्रचलित नहीं है, लेकिन किसान अब अपनाने लगे हैं. किसान खुद ही प्लास्टिक की क्लोच बनाकर इसका प्रयोग पौधों को पाले से बचाने में कर सकते हैं.
§अभी जिस तरह का मौसम चल रहा है, उससे इंसान से लेकर जानवर और यहां तक कि पेड़-पौधे भी परेशान हैं. तापमान में लगातार गिरावट और हड्डी कंपाने वाली ठंड ने हालत खराब कर दी है. शीतलहर ने सबको दुबकने पर मजबूर कर दिया है. यहां तक कि पौधों की पत्तियां सिकुड़ती जा रही हैं. ठंड से पनपे पाले ने फसलों को मरण की स्तिति में पहुंचा दिया है. ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई है. किसान अपनी रबी फसलों को लेकर चिंता में आ गए हैं. इन किसानों की चिंता दूर करने के लिए कृषि वैज्ञानिक सलाह दे रहे हैं. इसमें एक सलाह हीटर की है जिससे फसलों को पाले से बचाया जा सकता है.
कृषि एक्सपर्ट की मानें तो फसल, सब्जी या फलदार पौधों की दो पंक्तियों के बीच या आवश्यकतानुसार मेड़ों के आसपास हीटर लगाकर भी पाले के प्रभाव को कम किया जा सकता है. हीटर से मिट्टी और पौधों के आसपास का तापमान बढ़ जाता है. हीटर से निकलने वाली गर्मी के कारण मिट्टी की ऊपरी सतह पर धुएं की दीवार सी बन जाती है, जो मिट्टी की गर्मी को देर तक बनाए रखती है. इससे पाले से फसल बच जाती है. इस विधि में भी यह आवश्यक है कि समय पर बिजली की सही व्यवस्था हो.

