֍:बाजार में कीमतें एमएसपी से ज्यादा §ֆ:अखबार फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि खरीद के कामों में लगी सरकारी एजेंसियां जिनमें नैफेड और एनसीसीएफ शामिल हैं, दालों की किस्मों, खासकर चना खरीदने के लिए पीएसएफ का इस्तेमाल करेंगी. एक अधिकारी ने कहा, ‘चूंकि चना की कीमतें 5650 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी से ऊपर चल रही हैं, इसलिए पीएसएफ के तहत खरीद पर विचार किया जा रहा है.’ उपभोक्ता मामलों के विभाग के तहत वित्त वर्ष 2015 में पीएसएफ का गठन किया गया था. इसका मकसद दालों और प्याज का रणनीतिक बफर स्टॉक बनाए रखकर कृषि-बागवानी वस्तुओं की कीमतों में बहुत ज्यादा अस्थिरता से उपभोक्ताओं की रक्षा करना है. §֍:क्या है PSF और इसका मकसद §ֆ:सरकारी एजेंसियां किसानों से बाजार मूल्य पर जिंस खरीदती हैं. बजट वित्त वर्ष 2026 में पीएसएफ के लिए 4,020 करोड़ रुपये का खर्च तय किया गया है. इस फंड का प्रयोग आम तौर पर प्याज, आलू और टमाटर जैसी मुख्य सब्जियों के अलावा अरहर, उड़द, मूंग, मसूर और चना जैसी दालों की कीमतों में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए किया जाता है. पीएसएफ का प्रयोग करके बनाए गए स्टॉक को जमाखोरी और सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के साथ ही साथ उपभोक्ताओं को सस्ती कीमतों पर सप्लाई करने के लिए बाजार में जारी किया जाता है. §देश में दाल का स्टॉक कम होता जा रहा है और ऐसे में सरकार आने वाले दिनों में एक बड़ा कदम उठा सकती है. जो खबरें आ रही हैं उसके अनुसार सरकार किसानों से बाजार मूल्य पर दालें खरीदने के लिए प्राइस स्टेब्लाइजेशन फंड (पीएसएफ) का प्रयोग कर सकती है. बताया जा रहा है कि ऐसी खरीद की जरूरत इसलिए पड़ी है क्योंकि बाजार में दालों की कीमतें काफी ज्यादा है. इसकी वजह से किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर इसे बेचने से हिचक रहे हैं. दूसरी ओर स्टॉक कम होता जा रहा है और कई मामलों में बफर लेवल से नीचे जा सकता है.

