֍:क्या है यह आयोग?
§ֆ:इस नए आयोग का नाम “बिहार सवर्ण विकास आयोग” रखा गया है, जो अगड़ी जातियों (ब्राह्मण, राजपूत, भुमिहार, कायस्थ आदि) के शिक्षा, रोजगार और कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर काम करेगा। इसके तहत छात्रवृत्ति, नौकरी में आरक्षण नहीं मिलने वाले युवाओं के लिए रोजगार कार्यक्रम और आर्थिक सहायता जैसी पहलों पर विचार किया जाएगा।
§֍:नीतीश कुमार की सियासी चाल?
§ֆ:राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम नीतीश कुमार द्वारा 2025 के चुनाव से पहले सवर्ण मतदाताओं को लुभाने की रणनीति है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार में सवर्ण समुदाय का एक बड़ा वर्ग बीजेपी की ओर झुका है, और इस आयोग के जरिए जद(यू) सरकार उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।
§֍:विपक्ष की प्रतिक्रिया
§ֆ:बीजेपी ने इस फैसले को “चुनावी जुमला” बताया है, जबकि आरजेडी ने कहा कि यह सिर्फ जातिगत राजनीति को बढ़ावा देने वाला कदम है। हालांकि, सत्ताधारी जद(यू) का कहना है कि यह आयोग सभी वर्गों के संतुलित विकास के लिए जरूरी है।
§बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए अगड़ी जातियों के लिए एक विशेष विकास आयोग के गठन की घोषणा की है। इस आयोग का उद्देश्य राज्य के सवर्ण समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करना है।

