जय बजरंग प्रतिष्ठान, बिजरोल रोड, बड़ौत, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) में सात दिवसीय वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. जगदीश सिंह गुलिया (पूर्व संयुक्त कृषि निदेशक) ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण सत्र का विधिवत उद्घाटन किया।
अपने संबोधन में डॉ. गुलिया ने 35 वर्षों के मधुमक्खी पालन अनुभव को प्रतिभागियों के साथ साझा करते हुए वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि यदि वैज्ञानिक तरीके से पालन किया जाए, तो एक मधुमक्खी बॉक्स से प्रति वर्ष 35 से 40 किलोग्राम तक शहद का उत्पादन किया जा सकता है। इसके लिए मधुमक्खी बॉक्स को समय-समय पर ऐसे स्थानों पर ले जाना आवश्यक होता है जहाँ नेक्टर (पराग) प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो। इससे न केवल शहद उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों और मधुमक्खी पालकों की आय में भी उल्लेखनीय इजाफा होगा।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख मधुमक्खी पालक बब्बर सिंह, विजय सिंह, अजय सहारावत, रमेश, और महिला प्रतिभागी साक्षी सहित अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समन्वयक जे.के. श्योराण ने सभी प्रतिभागियों एवं मुख्य अतिथि का हार्दिक स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य रोज़गार के नए अवसर सृजित करना और कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देना है। आगामी सात दिनों में प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक तकनीकों, उपकरणों की जानकारी, मौसमी प्रबंधन, रोग नियंत्रण, एवं शहद/मोम संग्रहण व विपणन से संबंधित व्यावहारिक व सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

