बरसात का मौसम जहां खेत-खलिहानों के लिए वरदान साबित होता है, वहीं पोल्ट्री फार्मिंग करने वालों के लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं होता। भारी बारिश, बढ़ी हुई नमी और उमस भरा मौसम मुर्गियों के लिए जानलेवा बन सकता है। सेंट्रल एवियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (CARI), बरेली के वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के मौसम में पोल्ट्री बर्ड्स को विशेष देखभाल की जरूरत होती है, वरना बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं और उत्पादन पर सीधा असर डालती हैं।
सांसों पर बन आती है बात
बारिश के दौरान फार्म हाउस में हवा का सही आवागमन न हो तो उमस के कारण मुर्गियों का दम घुटने लगता है। बारिश के तुरंत बाद धूप निकलना इस परेशानी को और बढ़ा देता है। कई बार तो शेड के अंदर बंद मुर्गियों की मृत्यु तक हो जाती है। पोल्ट्री एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर हवा का प्रवाह सही न हो तो 70% बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
शेड मैनेजमेंट है पहली दवा
वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी बीमारी की दवा और वैक्सीन महज 30-40% असर दिखाती है, जबकि सही शेड मैनेजमेंट 60% से ज्यादा कारगर होता है। इसलिए पोल्ट्री शेड बनवाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वह उत्तर-दक्षिण दिशा में हो ताकि तेज धूप शेड में सीधे न घुसे। साथ ही, हर शेड में फैन और वेंटिलेशन सिस्टम होना अनिवार्य है।
वैक्सीनेशन में बूस्टर भी है जरूरी
पोल्ट्री में सिर्फ वैक्सीनेशन कराना ही काफी नहीं, यह भी देखना जरूरी है कि वैक्सीन के बाद एंटीबॉडी बनी है या नहीं। वैज्ञानिकों की सलाह है कि वैक्सीन के साथ इम्यूनिटी बूस्टर भी दिया जाए ताकि मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े और वह बदलते मौसम का मुकाबला कर सकें। गर्मी और बरसात के दौरान वैक्सीनेशन का सही समय रात 8 बजे या सुबह 4 बजे माना गया है।
पीने के पानी में मिलाएं दवा
हर मुर्गी को पकड़कर वैक्सीन देना कठिन हो सकता है। ऐसे में बाजार में उपलब्ध सीरप या टैबलेट फॉर्म में इम्यूनिटी बूस्टर को पीने के पानी में मिलाया जा सकता है, जिससे दवा सभी मुर्गियों तक पहुंचे और फार्म सुरक्षित रहे।

