ֆ:§֍:प्रशिक्षण के प्रमुख बिंदु:§ֆ:प्रशिक्षण में विषय विशेषज्ञ कुलदीप वर्मा ने प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी। उन्होंने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संरक्षण और खेती की लागत को कम करने में प्राकृतिक खेती की भूमिका को विस्तार से समझाया। उन्होंने यह भी बताया कि प्राकृतिक खेती से न केवल पर्यावरण की रक्षा होती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार होता है।
सहायक विकास अधिकारी जोगेन्दर सिंह ने किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी दी और बताया कि किस प्रकार इन योजनाओं के माध्यम से किसान प्राकृतिक खेती को अपनाकर लाभ उठा सकते हैं।
कृषि बीज प्रभारी इंद्रसेन तिवारी और आलोक यादव ने प्राकृतिक बीजों के उपयोग पर जोर देते हुए उनके पोषण मूल्य और उत्पादन क्षमता के बारे में विस्तार से चर्चा की।
§֍:किसानों की भागीदारी:§ֆ:कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील किसान हेमंत कुमार सिंह, सुरेश कुमार सिंह, अवध विहारी सिंह, सुरेंद्र कुमार गिरि, रामानंद वर्मा, अविनाश सिंह और सुनीता कुमारी सहित कई किसानों ने भाग लिया। इन किसानों ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस तरह उन्होंने रासायनिक उर्वरकों को छोड़कर अपनी खेती में जैविक विधियों को अपनाया।
§֍:प्रशिक्षण का उद्देश्य और प्रभाव:
§ֆ:इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती के दुष्परिणामों से अवगत कराना, प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना और उन्हें टिकाऊ कृषि की दिशा में प्रेरित करना था। किसानों ने प्रशिक्षण के अंत में प्राकृतिक खेती को अपनाने का संकल्प लिया और इसे एक लाभकारी, पर्यावरण के अनुकूल और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बताया।
यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि कृषि क्षेत्र भी अधिक टिकाऊ और संतुलित बनेगा।
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उत्तर प्रदेश के कंछर ग्राम पंचायत स्थित कृषि भवन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कृषि सखियों के लिए एक दिवसीय प्राकृतिक खेती जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना और उन्हें इसके लाभों से अवगत कराना था।

