कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने हाल ही में जैविक कपास प्रमाणन को लेकर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि भारत की राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत संचालित ऑर्गेनिक प्रमाणन प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी, तीसरे पक्ष द्वारा प्रमाणित और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
APEDA ने स्पष्ट किया कि NPOP के तहत जैविक प्रमाणन प्रणाली में तीसरे पक्ष द्वारा किया जाने वाला सख्त मूल्यांकन शामिल होता है, जिसे यूरोपीय आयोग, स्विट्जरलैंड और ग्रेट ब्रिटेन जैसे देशों द्वारा फसल स्तर पर मान्यता प्राप्त है। इसके अलावा, ताइवान के साथ भी जैविक उत्पादों के लिए आपसी मान्यता समझौता (MRA) है।
झूठे आंकड़ों और गलत व्याख्याओं को किया खारिज
APEDA ने बताया कि किसानों को जैविक खेती के लिए 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी देने का कोई प्रावधान नहीं है और इस प्रकार के आंकड़े पूर्णतः निराधार और भ्रामक हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि जैविक प्रमाणन केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फैला हुआ है।
ताजा रिकॉर्ड के अनुसार (दिनांक 19 जुलाई 2025), 4,712 सक्रिय जैविक उत्पादक समूहों (Organic Grower Groups) के माध्यम से लगभग 19.29 लाख किसान जैविक खेती से जुड़े हुए हैं, जिनमें अनाज, दालें, तिलहन, चाय, कॉफी, मसाले और कपास सहित कई फसलें शामिल हैं।
कपास उत्पादन स्तर तक ही NPOP की सीमा
APEDA ने यह भी स्पष्ट किया कि कपास का प्रमाणन NPOP के तहत केवल उत्पादन स्तर तक ही किया जाता है, जबकि जिनिंग और प्रोसेसिंग जैसे पश्चात क्रियाकलापों का प्रमाणन निजी एजेंसियों द्वारा किया जाता है।
मजबूत निगरानी तंत्र से लैस है NPOP
- प्रत्येक जैविक समूह को साल में दो बार आंतरिक निरीक्षण करना अनिवार्य है।
- प्रमाणन संस्थाएं (CB) प्रत्येक समूह की सालाना ऑडिट करती हैं, जिसमें दफ्तर और खेतों की जांच शामिल होती है।
- इसके अतिरिक्त, APEDA और राष्ट्रीय प्रत्यायन मंडल (NAB) द्वारा बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण किए जाते हैं, विशेष रूप से शिकायतों या जोखिम मूल्यांकन के आधार पर।
सख्त कार्यवाही और सुधारात्मक कदम
हाल के वर्षों में सामने आई कुछ अनियमितताओं पर APEDA ने जोरदार कार्यवाही की है:
- नियमों के उल्लंघन पर प्रमाणन एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है।
- नए और सख्त नियमों को लागू किया गया है, जैसे – समूह कार्यालय का स्थानीय स्तर पर होना, मोबाइल ऐप के माध्यम से निरीक्षण, कपास प्रमाणन के लिए क्षेत्रीय प्रतिबंध आदि।
- बिना पूर्व सूचना के निरीक्षणों की संख्या में कई गुना वृद्धि की गई है।
- दोषी उत्पादक समूहों और प्रमाणन एजेंसियों पर उचित दंडात्मक कार्यवाही की गई है।
राजनीतिक आरोपों को बताया भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण
APEDA ने हाल ही में एक विपक्षी नेता द्वारा प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद, निराधार और भ्रामक बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आरोप न केवल देश की मजबूत नियामक प्रणाली की साख को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि भारत में तेजी से बढ़ रही जैविक खेती की समूची व्यवस्था को भी कमज़ोर करने का प्रयास हैं।
APEDA की प्रतिबद्धता
APEDA ने दोहराया कि NPOP के अंतर्गत जैविक प्रमाणन प्रणाली को पारदर्शी, विश्वसनीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जहां भी अनियमितताओं के पुख्ता प्रमाण मिले हैं, वहां जांच कर उचित कार्रवाई की गई है।
इस बयान के माध्यम से APEDA ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत की जैविक प्रमाणन प्रणाली मजबूत, संतुलित और किसान हितैषी है, और इस पर किसी भी प्रकार के अनावश्यक राजनीतिक प्रहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

