मेरठ जनपद के ग्राम चांदपुरा में पशुपालकों के लिए एक दिवसीय पशु चिकित्सा एवं बाँझपन निवारण शिविर का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय बनाना और पशुओं में बाँझपन जैसी जटिल समस्याओं का समाधान करना था। इस शिविर का आयोजन सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ के पशु चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड द्वारा वित्तपोषित परियोजना के अंतर्गत किया गया। शिविर में पशुपालन विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र का सक्रिय सहयोग रहा।
शिविर का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. के. के. सिंह द्वारा किया गया, जबकि परियोजना प्रभारी प्रोफेसर डॉ. अमित वर्मा ने पशुओं के आहार में खनिज तत्वों और सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन पोषक तत्वों की कमी से पशुओं में भूख न लगना, समय पर हीट में न आना, गर्भपात, दूध उत्पादन में कमी और एनीमिया जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। उन्होंने पशुपालकों को प्रतिदिन 30 से 50 ग्राम खनिज मिश्रण देने की सलाह दी, ताकि पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे और वे अधिक उत्पादन दे सकें।
शिविर में 280 से अधिक पशुओं की स्वास्थ्य जाँच की गई, जिसमें अल्ट्रासाउंड, माइक्रोस्कोपी सहित अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया। स्वास्थ्य परीक्षण का कार्य डॉ. अमित वर्मा, डॉ. विकास जायसवाल, डॉ. अरबिंद सिंह, डॉ. अजीत कुमार सिंह, डॉ. अखिल पटेल, डॉ. तनु और डॉ. राजेश कुमार की विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया।
इस अवसर पर निःशुल्क औषधियाँ, खनिज मिश्रण और वैज्ञानिक परामर्श भी वितरित किए गए, जिससे उपस्थित पशुपालकों ने शिविर को अत्यंत लाभकारी बताया। शिविर की सफलता में क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारी डॉ. तनु, कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. राजेश, पशुधन प्रसार अधिकारी श्री राजू, तथा स्थानीय ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस शिविर ने पशुपालकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के साथ-साथ पशुओं की देखभाल और प्रजनन समस्याओं के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई है।

