अंबालावायल गाँव, जो केरल के वायनाड जिले में स्थित है, को अब आधिकारिक तौर पर ‘एवोकाडो सिटी’ का दर्जा दिया गया है। केरल के कृषि मंत्री पी. प्रसाद ने हाल ही में इस क्षेत्र में एवोकाडो की खेती और मार्केटिंग में हुई प्रगति की सराहना करते हुए इस नए नामकरण की घोषणा की। यह कदम इस क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो पिछले कुछ वर्षों से एवोकाडो की खेती से अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं 1।
एवोकाडो: किसानों के लिए नई उम्मीद
एवोकाडो, जिसे ‘बटर फ्रूट’ के नाम से भी जाना जाता है, आज केरल के किसानों के लिए एक लाभदायक फसल बन चुका है। वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने पर किसानों को प्रति पौधा 5,000 से 50,000 रुपये तक का मुनाफा हो रहा है। यह विशेष रूप से उन किसानों के लिए वरदान साबित हुआ है, जिनकी अन्य फसलें असफल हो रही थीं 1।
जून-जुलाई में होता है बड़े पैमाने पर निर्यात
हर साल जून और जुलाई के महीनों में अंबालावायल से टनों एवोकाडो का निर्यात किया जाता है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ी है, बल्कि इस क्षेत्र को एक प्रमुख कृषि केंद्र के रूप में पहचान भी मिली है। एवोकाडो की बढ़ती मांग को देखते हुए, स्थानीय प्रशासन ने इसे एक ब्रांडेड उत्पाद के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है 1।
एवोकाडो फेस्टिवल से बढ़ी किसानों की रुचि
इसी कड़ी में, अंबालावायल में एक एवोकाडो फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 500 किसानों ने भाग लिया। इस फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य एवोकाडो की खेती को बढ़ावा देना और किसानों को इसके वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराना था। अंबालावायल ग्राम पंचायत के उपाध्यक्ष के. शमीर ने बताया कि मेट्रोपोलिटन शहरों में इस फल की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों की आय में और वृद्धि होने की उम्मीद है 1।
किसानों को मिली विशेष ट्रेनिंग
दो दिवसीय एवोकाडो फेस्टिवल में किसानों को इसकी खेती के आर्थिक पहलुओं और वैज्ञानिक तकनीकों पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन अंबालावायल क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र (आरएआरएस), कृषि विज्ञान केंद्र, वायनाड हिल फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी और ग्राम पंचायत द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इसमें केरल के साथ-साथ अन्य राज्यों के किसानों ने भी हिस्सा लिया और नई संभावनाओं को तलाशने के तरीके सीखे 1।
एवोकाडो की खेती ने केरल के अंबालावायल क्षेत्र को एक नई पहचान दी है। सरकारी समर्थन और किसानों की मेहनत से यह क्षेत्र अब देशभर में एवोकाडो उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है, बल्कि भारत में एवोकाडो की खेती के नए अध्याय की शुरुआत भी हुई है।

