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फेरोमोन ट्रैप लगाएं
फसल की बुवाई के 40-50 दिन बाद प्रति एकड़ दो फेरोमोन ट्रैप लगाएं और प्रतिदिन खेत में जाकर ट्रैप की जांच करें। यदि लगातार तीन दिन तक ट्रैप में 5-8 कीट पाए जाते हैं तो माना जाता है कि कीटों के कारण आर्थिक नुकसान हुआ है। साथ ही विभाग ने सलाह दी है कि यदि कपास के पौधों पर 100 फूलों में से 5-10 फूल गुलाब की तरह बंद दिखाई दें और 20 हरे गुच्छों को खोलने पर उनमें से 2 में गुलाबी सुंडी दिखाई दे तो कीट संक्रमण की संभावना है।
कीटनाशकों का छिड़काव करें
नीम तेल की 5 मिली मात्रा या एनएसकेई 5% (50 मिली) + कपड़े धोने का पाउडर (1 ग्राम) एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें या नीम आधारित कीटनाशक 5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। डॉ. शर्मा ने बताया कि यह उपाय तब करना चाहिए जब कपास की फसल 60 दिन की हो जाए।
ट्राइकोग्रामा, लेडी बर्ड बीटल और क्राइसोपरला जैसे मित्र कीटों से बचाव करें ताकि हानिकारक कीटों की संख्या आर्थिक जोखिम स्तर से ऊपर न जाए।
कपास की फसल में रासायनिक प्रबंधन के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5%, क्विनालफॉस 1.50% डीपी, इथियोन 50% ईसी, फेनप्रोपेथ्रिन 10% ईसी या स्पिनेटोरम 11.70% एससी (बॉलवर्म के लिए) का प्रयोग करें।
§राजस्थान में कपास की खेती करने वाले किसानों को इस साल गुलाबी सुंडी से सावधान रहने की सलाह दी गई है। पिछले साल गुलाबी सुंडी ने राजस्थान में फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया था। कृषि विभाग और केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र (सीआईपीएमसी), श्रीगंगानगर की ओर से इस बारे में एडवाइजरी जारी की गई है, ताकि इस बार नुकसान से बचा जा सके। टिड्डी एवं केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र के उप निदेशक डॉ. आर.के. शर्मा ने बताया कि किसानों को सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने अपने खेतों में कपास की टहनियां जमा कर रखी हैं, उनमें गुलाबी सुंडी के संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसलिए उन्हें सलाह दी गई है कि वे कपास की टहनियों को छाया में या खेत में न रखें। अगर ऐसा करना जरूरी हो तो उन्हें प्लास्टिक शीट से ढक दें या जला दें। विभाग ने यह भी सलाह दी है कि अंतिम कटाई के बाद खेत में बची आधी खुली और क्षतिग्रस्त सुंडी को नष्ट करने के लिए भेड़, बकरी आदि जानवरों को खेत में चरने दें। फसल की प्रारंभिक अवस्था में गुलाबी सुंडी से प्रभावित गिरे हुए रोसेट फूल, फूल की फली और गुच्छों को इकट्ठा करके जला दें। किसानों को अपने खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए ताकि समय रहते गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण पाया जा सके।

