֍:कृषि क्षेत्र को AI से दूर नहीं रखना चाहिए: डिप्टी सीएम§ֆ:डिप्टी सीएम ने कहा कि एआई दुनिया भर के क्षेत्रों में क्रांति ला रहा है और कृषि को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए. आने वाले वर्षों में किसानों के पास एआई को न अपनाने जैसा विकल्प नहीं होगा, क्योंकि वे बदलते मौसम, बेमौसम बारिश, कीटों के हमले और श्रम की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं. ऐसे में उन्हें इसकी अनिवार्य रूप से जरूरत होगी. एआई उत्पादन लागत को कम करते हुए उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
§֍:किसानों को जमीन-फसल की मिलेगी विस्तृत जानकारी§ֆ:पवार ने कहा कि हम मिट्टी में कार्बन के स्तर को मापने और कीटों, बीमारियों और यहां तक कि खरपतवार के प्रकारों की पहचान करने में सक्षम होंगे, जिससे किसानों को उनकी फसलों और भूमि के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी. ये प्रगति अधिक सटीक खेती के तरीके और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करेगी. एआई के इस्तेमाल से सप्लाई चैन में ज्यादा दक्षता आएगी और कुल लागत में कमी आएगी.§महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और उत्पादन लागत घटाने के लिए प्रैक्टिकल तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के इस्तेमाल को लेकर विचार कर रही है. फसल स्वास्थ्य, मिट्टी के कार्बन स्तर और मिट्टी के स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण कारकों की निगरानी एआई के इस्तेमाल से आसानी से की जा सकती है, इसलिए हम उत्पादकता बढ़ाने और किसानों के लिए उत्पाद लागत कम करने के लिए कृषि क्षेत्र में प्रयोगात्मक आधार पर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि बदलाव किसानों के लिए व्यावहारिक और वित्तीय रूप से संभव होना चाहिए.

