֍:कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था की रीढ़§ֆ:केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत की लगभग 50 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है और जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान करीब 18 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, “कृषि केवल भोजन का स्रोत नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का आधार है और आने वाले समय में भी यह देश की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।”§֍:कृषि अनुसंधान में एकरूपता की आवश्यकता§ֆ:कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थानों के निदेशकों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि देशभर के 113 ICAR संस्थान और 731 कृषि विज्ञान केंद्र, केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर कृषि को सशक्त बनाने की दिशा में अहम योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, तो कृषि क्षेत्र में कम से कम 5% की वार्षिक विकास दर बनाए रखना अनिवार्य होगा।§֍:उत्पादन में क्षेत्रीय असमानता पर चिंता§ֆ:मंत्री ने कहा कि देश के 93% क्षेत्रों में अनाज की बुआई होती है, लेकिन दलहन और तिलहन की उत्पादकता अब भी चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि देश में मक्के की वृद्धि दर तमिलनाडु में अधिक है जबकि उत्तर प्रदेश में कम है। इसी प्रकार पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी उत्पादन में असमानता देखने को मिलती है।यह अंतर कृषि अनुसंधान और तकनीक के बेहतर प्रसार से कम किया जा सकता है, जिसके लिए संस्थानों की जिम्मेदारियों को पुनः परिभाषित करने की जरूरत है।§֍:कृषि निर्यात और अनुसंधान पर फोकस§ֆ:भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कृषि को भी 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करना होगा। फिलहाल कृषि उत्पादों का केवल 6% निर्यात हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 20% तक ले जाने का लक्ष्य है।चौहान ने कहा कि अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में भारत में केवल 0.4% कृषि बजट अनुसंधान पर खर्च होता है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है।§֍:विविधिकृत कृषि की ओर बढ़ने का समय§ֆ:उन्होंने आगाह किया कि देश में भूमि जोत का आकार लगातार घट रहा है और 2047 तक औसतन 0.6 हेक्टेयर रह जाएगा। ऐसे में केवल अनाज उत्पादन से काम नहीं चलेगा। पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, बागवानी जैसे वैकल्पिक कृषि मॉडल को अपनाना होगा।§֍:कम पानी में अधिक उत्पादन की रणनीति§ֆ:केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब आवश्यकता है कि कम पानी में अधिक उत्पादन करने की तकनीकों पर जोर दिया जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ खेती की टिकाऊ प्रकृति को भी बढ़ावा मिले।§कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कृषि शिक्षा और अनुसंधान देश में कृषि उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अगर भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, तो खेती को भी विकसित और आधुनिक बनाना होगा, और इसके लिए कृषि संस्थानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं को मिलकर ‘एक राष्ट्र, एक कृषि, एक टीम’ की भावना से काम करना होगा।

