֍:फार्मर रजिस्ट्री को लेकर कही ये बात§ֆ:केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि किसान रजिस्ट्री के दौरान कुछ समस्याएं आती हैं, तो उनके समाधान के लिए शिकायत निवारण तंत्र कार्य करता है, जिसमें किसान मोबाइल या वेब एप्लिकेशन का उपयोग कर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. ये क्रांतिकारी कदम भारत के किसानों की जिंदगी बदलकर रख देगा. अब तक 4 करोड़ 60 लाख से ज्यादा फार्मर ID बन चुकी हैं. किसी किसान ने अपनी जमीन बेच दी किसी ओर को, तो तत्काल किसान रजिस्ट्री में अपडेट हो जाएगा कि ये जमीन शिवराज के नाम नहीं, गिरिराज के नाम है. §֍:कृषि मंत्री ने कही ये बात§֍:§ֆ:शिवराज सिंह ने कहा कि एक प्रधानमंत्री कहते थे कि मैं एक रुपये भेजता हूं तो 15 पैसा पहुंचता है. लेकिन आज हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी एक क्लिक करते हैं और 9 करोड़ 80 लाख किसानों के खाते में सीधा पैसा पहुंच जाता है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि वितरण के कार्यक्रम में किसान सामने मोबाइल दिखाकर कहता है, पैसा खाते में आ गया. ये डिजिटल क्रांति के कारण संभव हुआ है. शिवराज सिंह ने कहा कि हम जो कहते हैं वो करते हैं, ये मोदी जी और एनडीए के नेतृत्व में भाजपा का मूलमंत्र है. उन्होंने आगे कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने देश के किसानों को किसान पहचान पत्र के रूप में बहुत उपयोगी सौगात दी है. डिजिटल फसल सर्वेक्षण से कृषि के लाभ के सही वितरण में मदद मिलती है. किसान रजिस्ट्री के दौरान कुछ समस्याएं आती हैं, तो उनके समाधान के लिए शिकायत निवारण तंत्र कार्य करता है, जिसमें किसान मोबाइल या वेब एप्लिकेशन का उपयोग कर शिकायत दर्ज कर सकते हैं.§֍:डिजिटल क्रांति पर जोर§ֆ:केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी और किसानों के डाटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार द्वारा अनेक उपाय किए गए हैं. डिजिटल क्रांति से सेवाओं में और योजनाओं का लाभ देने में क्रांतिकारी परिवर्तन किया जा सकता है. ये डाटा निजी डाटा है, जब तक किसान डाटा साझा करने के लिए अपनी स्पष्ट सहमति नहीं देता है, तब तक इसे साझा नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा किसानों की आय बढ़े, इसके लिए मोदी सरकार निरंतर कई उपाय कर रही है. पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है.§केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि जिन्होंने राग दरबारी उपन्यास लिखा था. उसमें एक पात्र था “किसान लंगड़”. वो लंगड़ अपने खेत की नकल प्राप्त करने के लिए तहसील जाता है. एक नहीं अनेक दिनों तक वो एक अधिकारी के पास-फिर दूसरे अधिकारी के पास. एक विभाग के पास-दूसरे विभाग के पास. फिर तीसरे विभाग के पास भटकता रहता है और अंततः उसे नकल नहीं मिलती. उस “लंगड़” की तकलीफ को कभी सामने वालों (विपक्ष) ने नहीं समझा. कांग्रेस ने आजादी के वर्षों बाद तक देश में शासन किया, लेकिन कभी किसानों की तकलीफ को नहीं समझा. इस तकलीफ को हमारे विजनरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समझा और डिजिटल कृषि मिशन बनाकर किसानों की सारी दिक्कतें समाप्त करने का फैसला किया.

