कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मशीनीकरण एवं प्रौद्योगिकी प्रभाग द्वारा नई दिल्ली में ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्लेटफॉर्म वर्जन 2.0’ और ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ के क्रियान्वयन पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्घाटन कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर अतिरिक्त सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मेहेरदा और संयुक्त सचिव (मशीनीकरण एवं प्रौद्योगिकी) एस. रुक्मणि भी उपस्थित रहीं। कार्यशाला में केंद्र व राज्य सरकारों के कृषि और ग्रामीण विकास विभागों के अधिकारी तथा प्रमुख उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
ड्रोन तकनीक को मिलेगा वैज्ञानिक दिशा-निर्देश
डॉ. चतुर्वेदी ने कार्यशाला में विभिन्न फसलों के लिए ड्रोन से उर्वरक एवं पोषक तत्वों के छिड़काव हेतु तैयार किए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) का विमोचन किया। ये SOPs देशभर में ड्रोन संचालन की एकरूपता और वैज्ञानिकता सुनिश्चित करेंगे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से योजनाओं में आएगी पारदर्शिता
कृषि सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स आज के दौर में कृषि योजनाओं को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने DBT पोर्टल के नवीनतम संस्करण और ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ के अंतर्गत तैयार ड्रोन पोर्टल को किसानों, खासकर लघु एवं सीमांत किसानों, के लिए लाभकारी बताया। ये पोर्टल किसानों को सब्सिडी के साथ आधुनिक मशीनें प्राप्त करने में मदद करेंगे और भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म करेंगे।
महिलाओं को मिलेगी तकनीकी ताकत
‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर उन्हें कृषि कार्यों जैसे उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव में सक्षम बनाया जाएगा। इससे एक ओर जहां महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर कृषि में आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग हो सकेगा।
ड्रोन पोर्टल से होगी ट्रैकिंग और निगरानी आसान
कार्यशाला में राज्यों को नया ‘ड्रोन पोर्टल’ भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें ड्रोन संचालन, पायलट प्रशिक्षण, प्रमाणन प्रक्रिया और सभी संबंधित पक्षों की निगरानी के लिए एकीकृत डैशबोर्ड की सुविधा है।
DBT पोर्टल 2.0 किसानों के लिए एक बड़ी राहत
कार्यशाला में DBT पोर्टल वर्जन 2.0 का लाइव प्रदर्शन भी किया गया, जिससे राज्य स्तरीय नोडल अधिकारियों को इसकी कार्यप्रणाली, विशेषताओं और अनुप्रयोग प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। यह नया पोर्टल कृषि मशीनीकरण उपमिशन (SMAM) के तहत किसानों को लाभ पहुंचाने में आ रही समस्याओं जैसे सब्सिडी में देरी, पारदर्शिता की कमी और मैनुअल प्रक्रियाओं की जटिलता को दूर करेगा।
राज्यों ने साझा किए अनुभव और सुझाव
कार्यशाला में राज्यों के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और पोर्टल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव भी दिए। विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाए गए बेहतर प्रथाओं से अन्य राज्यों को भी मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
कृषि सचिव डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि डिजिटल नवाचारों से न केवल योजनाओं की निगरानी आसान होगी, बल्कि किसानों तक लाभों की समयबद्ध पहुंच भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने राज्यों से इस दिशा में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया और कहा कि केंद्र एवं राज्य मिलकर कृषि मशीनीकरण को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करें।

