केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST-K), श्रीनगर के छठे दीक्षांत समारोह में भाग लिया और 5,250 से अधिक छात्रों को स्नातक, परास्नातक और पीएचडी की डिग्रियां प्रदान कीं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री एवं प्रो-चांसलर श्री उमर अब्दुल्ला, राज्य के कृषि मंत्री श्री जाविद अहमद डार, उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र चौधरी, शिक्षा मंत्री सुश्री सकीना मसूद सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, “दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नए ज्ञान की शुरुआत है। अब समय आ गया है कि आपने जो ज्ञान कक्षाओं और प्रयोगशालाओं में पाया है, उसे समाज के हित में प्रयोग करें।” उन्होंने SKUAST-K की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि यह विश्वविद्यालय जल्द ही देश के सर्वोच्च राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में शामिल होगा।
केंद्रीय मंत्री ने छात्रों से आह्वान किया कि वे कृषि क्षेत्र में नवाचार करें, स्टार्टअप शुरू करें और अत्याधुनिक तकनीकों का विकास करें। उन्होंने कहा, “कृषि केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। बिना खेती के न देश चल सकता है, न दुनिया।”
उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में 44% की वृद्धि हुई है, जिसमें चावल, गेहूं, मक्का, सोयाबीन और मूंगफली जैसे फसलों में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने जम्मू-कश्मीर को “भारत का ताज” बताते हुए कहा कि यहां की मिट्टी की खुशबू, लोगों का अपनापन और प्राकृतिक सौंदर्य उन्हें भावविभोर कर गया। उन्होंने SKUAST-K की बहुप्रांतीय और अंतरराष्ट्रीय छात्र भागीदारी को देश की एकता का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के फल, फूल और सब्जियां स्वाद और रंग में बेजोड़ हैं। इस क्षेत्र को वैश्विक बागवानी केंद्र बनाने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में ₹150 करोड़ की लागत से एक ‘क्लीन प्लांट सेंटर‘ की स्थापना की जा रही है, जिससे स्थानीय किसानों को वायरस-मुक्त पौध सामग्री उपलब्ध होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य में 5,000 हेक्टेयर सेब के बागानों में प्रति हेक्टेयर उत्पादन 10 टन से बढ़कर 60 टन तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा, “अब समय है कि कश्मीरी सेब विदेशों में निर्यात हों और भारत को सेब आयात करने की आवश्यकता न पड़े।”
केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत छह सूत्रीय कृषि रणनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उचित मूल्य सुनिश्चित करना, क्षति का मुआवजा देना, कृषि का विविधीकरण करना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना शामिल है। छात्रों से उन्होंने आग्रह किया कि वे केवल अपने लिए न जिएं, बल्कि दूसरों के लिए भी कुछ करें। “व्यावहारिक ज्ञान को अपनाएं, सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान ही काफी नहीं होता। आपके भीतर असीम क्षमताएं हैं।”
स्वामी विवेकानंद के विचारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “मनुष्य अनंत शक्ति का भंडार है, वह जो चाहे कर सकता है।”
उन्होंने अपने हालिया सीमावर्ती गांवों के दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि विकास की रोशनी हर कोने तक पहुंचनी चाहिए, और छात्रों से अपील की कि वे उद्देश्यपूर्ण जीवन जिएं और समाज के निर्माण में योगदान दें।समारोह में 150 गोल्ड मेडल और 445 मेरिट सर्टिफिकेट भी प्रदान किए गए। यह आयोजन जम्मू-कश्मीर की शिक्षा और कृषि क्षेत्र में एक प्रेरणास्पद उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

