सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ ने पिछले तीन वर्षों में शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी विस्तार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. के.के. सिंह के दूरदर्शी और रणनीतिक नेतृत्व में विश्वविद्यालय न केवल अकादमिक मोर्चे पर सशक्त हुआ है, बल्कि कृषि विज्ञान की नई तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने में भी प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है।
हाल ही में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति की सराहना की और वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप शिक्षा और अनुसंधान में नवाचार को बढ़ावा दें।
वित्तीय सहायता के लिए गुणवत्तापूर्ण परियोजनाओं पर जोर
डॉ. संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार उन शोध परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने के लिए तत्पर है, जो स्थानीय कृषि समस्याओं के समाधान में प्रभावी हों और जिनका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। उन्होंने वैज्ञानिकों को सुझाव दिया कि वे क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार ऐसी परियोजनाएं बनाएं जिनसे किसानों की आय में वृद्धि हो और उत्पादन क्षमता बढ़े।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल परियोजना बनाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी परिणामात्मकता और व्यावहारिक उपयोगिता सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है। वैज्ञानिकों से नई किस्मों के विकास, प्रसार तकनीकों में नवाचार, और उत्पादकता बढ़ाने वाली तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया गया।
शोध, प्रकाशन और पेटेंट पर विशेष बल
डॉ. सिंह ने वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध पत्र प्रकाशित करने, गुणवत्ता आधारित जर्नल्स में योगदान देने, और शोध कार्यों को पेटेंट कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इसे न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि बल्कि संस्थान की रैंकिंग और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा।
छात्र प्लेसमेंट में बढ़ोत्तरी से संस्थान की साख में वृद्धि
कुलपति डॉ. के.के. सिंह द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय में छात्रों के प्लेसमेंट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। डॉ. सिंह ने बताया कि इस सकारात्मक रुझान से छात्रों को करियर निर्माण में मदद मिल रही है और साथ ही विश्वविद्यालय की साख प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ हो रही है।
नई तकनीकों पर आधारित शोध की आवश्यकता
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के उप महानिदेशक डॉ. राज ऋषि गौर ने बायोटेक्नोलॉजी जैसी उभरती तकनीकों को केंद्र में रखकर शोध परियोजनाएं तैयार करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान को प्रयोगशाला से खेत तक लाने की जरूरत है, जिससे किसानों को समय पर तकनीकी लाभ मिल सके।
वहीं उप महानिदेशक डॉ. परविंदर सिंह ने शोध को प्राथमिकता पर रखने और गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक लेखन और पेटेंट के प्रति प्रतिबद्धता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अब वह समय आ चुका है जब हर वैज्ञानिक को शोध में उत्कृष्टता की ओर अग्रसर होना चाहिए।
प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यों की जानकारी साझा
इस अवसर पर निदेशक शोध डॉ. कमल खिलाड़ी ने विश्वविद्यालय में चल रही विभिन्न शोध परियोजनाओं का ब्यौरा साझा किया। प्रोफेसर डी.वी. सिंह ने शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रकाश डाला, वहीं प्रसार निदेशक डॉ. पी.के. सिंह ने विश्वविद्यालय के तकनीकी प्रसार कार्यों की प्रस्तुति दी, जिसमें किसानों को प्रशिक्षित करने, फील्ड डेमोंस्ट्रेशन, और तकनीकी जागरूकता शिविरों की जानकारी दी गई।
बैठक में विभिन्न विभागों के परियोजना अन्वेषक, विभागाध्यक्ष, और शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कृषि क्षेत्र में नवाचार और प्रभावी अनुसंधान के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और समस्याओं का समाधान खोजने के लिए सामूहिक प्रयास करने पर सहमति जताई।

