֍:कुछ दिनों पहले से मंडियों में किसान प्याज की कीमत में गावट को लेकर परेशान थे. लेकिन अब इसमें आलू और टमाटर भू जुड़ गए हैं. अब इन दोनों फसलों के दामों में भी गिरावट देखी जा रही है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने से टमाटर के दामों में 56 फीसदी, आलू में 28 फीसदी और प्याज के दामों में 37 फीसदी तक की गिरावट आ गई है. ऐसे में आम आदमी को थोड़ी राहत मिली है लेकिन किसान एक बार फिर निराश होकर कम दाम में फसल बेचने को मजबूर है. §ֆ:आलू के दामों में भारी गिरावट देखने के बाद किसानों को मजबूरन कम दामों में फसल बिक्री करनी पड़ रही है. ऐसे में हिमाचल प्रदेश की पीलमपुर मंडी में 1700-1800 रुपये प्रति क्विंटल रेट हैं. वहीं, कर्नाटक के अरासीकेरे में 2000-6000, हरियाणा के मोहिन्दरगढ़ में 1400-1500, गुजरात के वधवान में 2000-3000 और उत्तर प्रदेश की फतेहाबाद मंडी में 1200-1600 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव चल रहे हैं.§֍:मंडियों में प्याज के भाव§ֆ:प्याज के दाम पिछले महीने से ही गिरावट की ओर इशारा कर रहे थे. इससे पहले एक न्यूज रिपोर्ट में किसानों द्वारा 1 रुपये प्रति किलो प्याज बेचने की बात सामने आई थी. वर्मान की बात करें तो महाराष्ट्र की शेवगांव मंडी में 500-1500 रुपये प्रति क्विंटल दाम चल रहा है. वहीं, हरियाणा की शाहाबाद मंडी में 2000-3000, गुजरात की मेहासाणा मंडी में 1250-2600, उत्तर प्रदेश की बलिया मंडी में 2170-2230 और गुजरात की राजकोट मंडी में 550-2250 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव पहुंच गए हैं.§֍:जानें टमाटर के भाव§ֆ:टमाटर क दामों की बात करें तो गुजरात की अंकलेश्वर मंडी में 1000-1500 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिल रहा है. वहीं, उत्तर प्रदेश की बड़ौत मंडी में 1600-1800, पश्चिम बंगाल की बीरभूम मंडी में 1600-1800, उत्तर प्रदेश की लखनऊ मंडी में 1400-1500 और आंध्र प्रदेश की पट्टिकॉडा मंडी में 1000-1800 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मिल रहा है. §कुछ दिनों पहले से मंडियों में किसान प्याज की कीमत में गावट को लेकर परेशान थे. लेकिन अब इसमें आलू और टमाटर भू जुड़ गए हैं. अब इन दोनों फसलों के दामों में भी गिरावट देखी जा रही है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने से टमाटर के दामों में 56 फीसदी, आलू में 28 फीसदी और प्याज के दामों में 37 फीसदी तक की गिरावट आ गई है. ऐसे में आम आदमी को थोड़ी राहत मिली है लेकिन किसान एक बार फिर निराश होकर कम दाम में फसल बेचने को मजबूर है.

