֍:किसानों ने बताई अपनी परेशानी§ֆ:वहीं, किसानों ने कहा है कि चालू सत्र में भुगतान एक महीने से ज्यादा देर से शुरू हुआ है. अगर यह ऐसे चलता रहा तो पिछली बार की तरह सत्र खत्म होने से पहले करोड़ों रुपये का बकाया अटक जाएगा. ‘दि ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों ने कहा कि सरकार और मिल अधिकारियों को यह समझने की जरूरत है कि किसानों को भी अपना बकाया और खेत मजदूरों को पैसे देने की जरूरर पड़ती है. उन्हें इस परेशानी को दूर करने के लिए कोई स्थायी हल निकालना चाहिए.
§֍:चालू सीजन में 1 करोड़ रुपये का भुगतान§ֆ:किसानों ने कहा कि अब तक करीब 14 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है, जिसकी कीमत करीब 54 करोड़ रुपये है. लेकिन अगर भुगतान देखें तो सिर्फ 1 करोड़ रुपये ही किसानों को भुगतान किया गया है. गन्ना किसान और भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के नेता राजीव शर्मा ने कहा कि मिलों ने पिछले सीजन का बकाया चुका दिया है, लेकिन इस सीजन में भुगतान में देरी से किसान चिंतित है.§अंबाला में गन्ना किसान इस बार के भुगतान के बकाया होने से परेशान हैं. उन्होंने अपनी समस्याएं बताते हुए मिलों और सरकार से समय पर भुगतान की अपील की है. हालांकि, नारायणगढ़ शुगर मिल लिमिटेड ने गन्ना किसानों को थोड़ी राहत दी है. मिल ने पिछले साल के गन्ना भुगतान का बकाया दे दिया है. वहीं, अब चालू सत्र को लेकर आशंका है कि इसके भुगतान में देरी होगी. बता दें कि इस सीजन में 15 नवंबर से चीनी मिलों में पेराई का काम शुरू हुआ.
इस समय तक पिछले सत्र के 22.74 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया था. चीनी मिलें किस्त के रूप में बकाया का भुगतान कर रही हैं. चीनी मिलों का कहना है कि पिछला बकाया क्लीयर करने के बाद चालू सत्र का भुगतान शुरू किया जा चुका है.

