֍:खाद और लकड़ी का चयन§ֆ:मशरूम उत्पादन के लिए सबस्ट्रैट जैसे- लकड़ी के टुकड़े और कम्पोैस्टं का चुनाव सबसे ज्यादा जरूरी है. खाद बनाने के लिए भूसा, गेहूं के चापड़ (चोकर), जिप्सम, यूरिया का उपयोग किया जाता है. इन्हेंक मिलाने के बाद कई दिनों तक रखने के बाद कम्पोस्ट तैयार होती है. सबस्ट्रे ट में नमी की मात्रा का ध्याईन रखना जरूरी होता है. ऐसे में डिवाइस के माध्यहम से नमी का स्तर जांचना और ध्यारन में रखना बहुत जरूरी है, नहीं तो मशरूम उत्पाहदन प्रभावित हो सकता है.§֍:§ֆ:मशरूम उत्पाटदन के लिए कमरे का तापमान मेंटेन करने की जरूरत होती है. ऐसे में कम या ज्यातदा तापमान होने से मशरूम उगाने में परेशानी हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि तापमान कंट्रोल में रहे. साथ ही कंट्रोल्ड एन्वा यरनमेंट के साथ ही मशरूम उगाने के लिए रूम में वेंटिलेशन की भी पर्याप्त व्येवस्था होनी चाहिए. इसका ध्याएन न रखे जाने पर उत्पाेदन पर असर पड़ सकता है और क्वा्लिटी भी खराब रह सकती है.§֍:सही समय पर तुड़ाई§ֆ:वहीं, इसके अलावा अंत में बारी होती है मशरूम हार्वेस्टिंग की यानी तुड़ाई की. मशरूम की तुड़ाई सही समय पर करना जरूरी है. लंबे समय तक उपज न लेने से मशरूम खराब भी हो सकता है.§भारत में मशरूम को बेहद पसंद किया जाता है. इसमें कई प्रकार के पोषण तत्वों के साथ स्वाद भी होता है. इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन, विटामिन, पोटेशियम, फॉस्फोेरस और एंटी ऑक्सी डेंट्स जैसे तत्वम पाए जाते हैं. साथ ही मशरूम के सेवन से इम्यू निटी बूस्ट होती है. मशरूम में मौजूद पॉली-सैकेराइड्स पाचन दुरुस्तप करते हैं. इसी के चलते कई किसान भी मुनाफे के लिए मशरूम की खेती शुरु कर देते हैं. ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है.

