֍:प्रशासन ने दिया जागरुकता संदेश§ֆ:हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि होने पर प्रशासन सतर्क हो गया और राज्य के किसानों को पर्यावरण सवच्छ करने के लिए जागरुक करने में जुट गया. इस दौरान करनाल में प्रशासन की टीमों ने किसानों के बीच जाकर उन्हें पराली न जलाने को लेकर जागरुक किया. इसका नतीजा ये रहा कि किसानों ने समझदारी दिखाते हुए फसल अवशेष प्रबंधन के तरीके तेजी से अपनाने शुरू किए. जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिन्हें देखकर प्रशासनिक अधिकारी खुश हो सकते हैं. कृषि विभाग के आकड़ों के अनुसार, किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन के तरीके अपनाकर 60 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी अर्जित की, जो किसानों के लिए एक बहुत बड़ी राशि हैं.§֍:पराली प्रबंधन पर मिलती है इतनी राशि§ֆ:वायु गुणवत्ता और प्रदूषण के स्तर को देखते हुए राज्य के किसानों ने पराली की घटनाओं पर तेजी से लगाम लगाई. जिसके बाद पराली में आग नहीं लगाई, ऐसे में करीब 1 लाख 80 हजार एकड़ के लिए किसानों ने सरकार की योजना का लाभ उठाने के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर अप्लाई किया. पोर्टल पर अप्लाई करने वाले किसानों को राज्य सरकार की ओर से 1000 रुपये प्रति एकड़ की राशि उपलब्ध कराई जाएगी. इसके अलावा जिले में कार्यरत औद्योगिक ईकाईयों ने किसानों से सीधे तौर पर करीब साढ़े 3 लाख एमटी पराली खरीदी, जो पराली की बहुत बड़ी मात्रा हैं. इसके अलावा जिले में नए डिपो बने, नए किसान ओर नए एग्रीगेटर आए, जिन्होंने पराली प्रबंधन में काफी अच्छा काम किया.§֍:
अगले सीजन जल्द लग जाएंगी टीमें
§ֆ:कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप कृषि निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि पिछले साल 126 मामले दर्ज किए गए थे. जबकि, इस साल 94 मामले सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि किसान तेजी से फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों को अपना रहे हैं, जो उनके लिए फायदेमंद भी हो रहा है. उन्होंने कहा कि अगले साल पराली जलाने के मामले शून्य स्तर पर करने के लिए पूरी ताकत के साथ फील्ड में टीमों को उतारा जाएगा. §हरियाणा किसान पराली प्रबंधन को लेकर जागरुक हो रहे हैं. इसी वजह से राज्य में पराली जलाने की घटनाएं काफी कम हो गई हैं. बता दें कि पराली प्रबंधन करके करनाल जिले के किसानों ने 60 करोड़ रुपये कमा लिए हैं. कृषि उप निदेशक ने बताया कि किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और प्रबंधन से होने वाले फायदे बताने के लिए 600 टीमों को लगाया गया था, जिनकी मेहनत रंग लाई है. उन्होंने कहा कि अगले सीजन में धान कटाई से पहले ही किसानों को पराली प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी, जिससे पराली जलाने की घटनाओं को शून्य तक लाया जा सके.

