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Home सफ़लता की कहानी

कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस में क्लाइमेट चेंज से जुड़ी समस्याओं का निवारण करने पर चर्चा, ऐसा होगा मॉडल !

Fiza by Fiza
November 29, 2024
in सफ़लता की कहानी
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कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस में क्लाइमेट चेंज से जुड़ी समस्याओं का निवारण करने पर चर्चा, ऐसा होगा मॉडल !
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ֆ:§֍:
NCUI अध्यक्ष ने किया संबोधन
§ֆ:नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने कहा है कि भारत में दुनियाभर के सहकारिता क्षेत्र का मार्गदर्शन करने की क्षमता है. भारत का जो सहकारिता मॉडल है उससे न सिर्फ वैश्विक असमानता दूर हो सकती है बल्किर क्लाइमेट चेंज से उपजी समस्याओं का समाधान भी हो सकता है. वर्ल्ड कोऑपरेटिव इकोनॉमिक फोरम भारत के सहकारिता मॉडल को वैश्विक पटल पर अगले वर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ में नए तरीके से पेश करेगा. हम ऐसा आर्थिक विकास चाहते हैं जिसमें सभी देशवासी विकास करें. इसमें किसानों, ग्रामीणों और महिलाओं सबकी तरक्की हो. इसके लिए सरकार पैक्स को मजबूत कर रही है. §֍:पैक्स हो रहा तकनीकों से लैस§ֆ:कार्यक्रम के दौरान फोरम के कार्यकारी अध्यक्ष बिनोद आनंद ने कहा कि 2021 में सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद इससे जुड़े कार्यों में तेजी आई है. पैक्स को तकनीक से लैस किया जा रहा है. इसके तहत उन्हें कई नए कामकाज से जोड़ा जा रहा है. भारत में सहकारिता का काम सही रास्ते पर है, लेकिन अब समय कोऑपरेटिव इकोमिक जोन भी बनाने का है. साथ ही वैश्विक स्तर पर कमोडिटी का व्यापार भी सहकारिता के सिद्धान्तों पर स्थापित करने का सही समय आ गया है. §֍:NDDB चेयरमैन ने बायो एनर्जी पर दिया जोर§ֆ:नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन मीनीश शाह ने कहा कि नेट जीरो इमीशन के लिए बायो एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाने की जरूरत है. किसान अपने पशु और खेती बाड़ी के अवशिष्ट पदार्थो के ऊर्जा का समुचित तौर पर मैनेजमेंट कर भारत को नई दिशा में ले जा सकते हैं. §ֆ:आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड डायरेक्टर सतीश मराठे ने कहा कि सहकारी सदस्यों के वित्तीय साक्षरता की जरूरत पर जोर देना हमारा लक्ष्य होना चाहिए. साथ ही जनधन अकाउंट, मोबाइल और आधार कार्ड के सदुपयोग होना चाहिए. उन्होंने आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए नियामकों में जो सुधार को लेकर बात रखी और उसपर एक संकलन करके अगले वर्ष संयुक्त राष्ट्र में रखने की बात कही.§ֆ:§֍:एग्री और बैकिंग सेक्टर §ֆ:डब्ल्यूकोऑपईएफ के युवा विंग के अध्यक्ष हर्ष संघानी ने कोऑपरेटिव को एग्रीकल्चर और बैंकिंग से आगे ले जाने की वकालत की. उन्होंने आगे कहा कि कार्बन क्रेडिट लेने के लिए सहकारिता मॉडल रोडमैप बनाना जरूरी है. साथ ही सहकारी आंदोलन के जरिए न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा बल्कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान भी कि‍या जा सकेगा. §֍:महिलाएं लीड करें ग्राम पंचातों में पैक्स §ֆ:पब्लिक पॉलिया के एक्सपर्ट विनीता हरिहरन ने कहा कि भारत में कॉऑपरेटिव मूवमेंट बहुत पुराना है. इसका एक गौरवशाली इतिहास है. लेकिन जब से केंद्र में सहकारिता मंत्रालय बना है तब से इस सेक्टर में नई जान आ गई है. इसमें पैक्स का जो मॉर्डनाइजेंशन हो रहा है उसका परिणाम आने वाले कुछ दिनों में दिखासई देने लगेगा. उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन में महिलाओं की अहम भूमिका है. अब मल्टीस्टेट कॉपरेटिव में वुमेन डायरेक्टर बनाना अनिवार्य हो गया है. लेकिन अब सारे ग्राम पंचायतों में एक-एक पैक्स ऐसा होना चाहिए जिसे महिलाओं द्वारा लीड किया जाए. इसमें महिला कॉपरेटिव की सफलता का टर्की बड़ा उदाहरण है.§ֆ:इस दौरान राष्ट्रीय राज्य सहकारी बैंक महासंघ लिमिटेड (नेफ्सकॉब) के अध्यक्ष केके राव, इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट के प्रोफेसर डॉ. राकेश अरावतिया, धनुका ग्रुप के आरजी अग्रवाल, डॉ. मल्लिका कुमार, वैकुंठ मेहता नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कोऑपेरेटिव मैनेजमेंट की निदेशक डॉ. हेमा यादव, इंडियन इकोनॉमिक सर्विधसेज के अधिकारी डॉ. केके त्रिपाठी, किसान नेता कृष्णवीर चौधरी और सहकारी नेता जीतेंद्र शर्मा सहित कई लोगों ने अपनी बात रखी. §वर्ल्ड कोऑपरेशन इकोनॉमिक फोरम ने गुरुवार को दिल्ली में इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस के ग्लोबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया. कार्यक्रम नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष दिलीपभाई संघानी की अध्यक्षता में और भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड के सदस्य सतीश मराठे की सह-अध्यक्षता में हुआ. इस दौरान 16 देशों के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें नीति निर्माता, सहकारी नेता और आर्थिक विशेषज्ञ शामिल रहे. कार्यक्रम का संचालन वर्ल्ड को-ऑप फोरम के कार्यकारी अध्यक्ष बिनोद आनंद ने किया. कार्यक्रम में मुख्य चर्चा का विषय केंद्र सहकारी आंदोलन के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना और असमानता, जलवायु परिवर्तन और वित्तीय समावेशन जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना था.

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