֍:1976 में आए थे इफको§ֆ:केमिकल इंजीनियर डॉ. अवस्थी इफको में सन् 1976 में नियुक्त हुए थे. उनके नेतृत्व में इस सहकारी संस्था ने अपनी उत्पादन क्षमता में 292% और शुद्ध संपत्ति में 688% की वृद्धि की. उनके नेतृत्व में इफको ने विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में कदम रखा है, अपने व्यवसाय में विविधता लाई है और भारत के किसानों के लिए सफलतापूर्वक नवाचार और स्वदेशी नैनो उर्वरक विकसित किया है.§֍:डॉ. अवस्थी ने कही ये बात§ֆ:डॉ. अवस्थी ने कहा, “इफको ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया (तरल) जैसे नैनो उर्वरकों के माध्यम से टिकाऊ कृषि का समर्थन किया, कृषि पद्धतियों में बदलाव किया और पर्यावरण-अनुकूल समाधानों की मांग को पूरा किया है. स्वदेशी नैनो उर्वरकों ने लॉजिस्टिक मुद्दों से निपटने, भारत की उर्वरक आयात निर्भरता कम करने और भारी पैकेजिंग को कॉम्पैक्ट बोतलों से बदल दिया. इन नवाचारों ने मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार किया, किसानों की लाभप्रदता को बढ़ावा दिया और पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार खेती को बढ़ावा दिया है.“ इफको के नए स्वदेशी उत्पाद नैनो यूरिया (तरल) और नैनो डीएपी (तरल) का उपयोग अब पूरे देश के किसान खुशी से कर रहे हैं। भारत के हर कोने और कुछ अन्य देशों, विशेष रूप से पड़ोसी देशों के किसानों द्वारा व्यापक रूप से इसे स्वीकार किया जा रहा है. नैनो उर्वरकों की आपूर्ति के लिए अन्य देश भी इफको से संपर्क कर रहे हैं. भविष्य में हम 25 और देशों में नैनो उर्वरक निर्यात करने की योजना बना रहे हैं.”§इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी को प्रतिष्ठित रोशडेल पायनियर्स अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया है. यह अवार्ड डॉ. वर्गीस कुरियन के बाद डॉ. अवस्थी को मिला है, जो कि लिस्ट में दूसरे भारतीय हैं. डॉ. कुरियन को वर्ष 2001 में यह पुरस्कार प्रदान किया गया था. रोशडेल पायनियर्स अवार्ड इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (आईसीए) द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है. इस अवार्ड की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई थी. इसका उद्देश्य एक व्यक्ति या विशेष परिस्थितियों में एक सहकारी संगठन को मान्यता देना है, जिसने नवीन और वित्तीय रूप से टिकाऊ सहकारी गतिविधियों में योगदान दिया है जिससे उनके सदस्यों को काफी लाभ हुआ है.

