֍:’हरियाणा की तरह कार्य करे पंजाब’§ֆ:’दि ट्रिब्यू न’ की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र ने हलफनामे में हरियाणा सरकार की ओर से अपने बजट से उठाए गए कदमों का जिक्र किया. कहा कि वहां पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए रेड जोन पंचायतों को 1 लाख रुपये और येलो जोन पंचायतों को 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. इसके अलावा ‘मेरा पानी मेरी विरासत योजना’ के तहत धान की खेती वाले इलाके में वैकल्पिक फसलों के लिए 7,000 रुपये प्रति एकड़ और चावल की सीधी बुवाई अपनाने के लिए 4,000 रुपये प्रति एकड़ राशि राज्य् सरकार प्रोत्सा0हन के रूप में दे रही है, जिनकी वजह से हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है.§֍:पंजाब के महाधिवक्ता ने दी जानकारी§ֆ:पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की 1,200 करोड़ रुपये की मांग को लेकर केंद्र सरकार को दो हफ्ते में उचित निर्णय लेने के लिए कहा था. पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने कहा कि किसानों पर कड़ी कार्रवाई करना और दंडित करना समस्या का समाधान नहीं है. इनमें से ज्यामदातर सीमांत किसान हैं, जिन्हें वाकई में प्रोत्साहन राशि दिए जाने की जरूरत है.§पंजाब में पराली की समस्या काफी तेजी से बढ़ी रही थी. इससे दिल्ली समेत कई राज्यों की हवा दूषित हो रही है. ऐसे में पंजाब सरकार ने केंद्र से पराली जलाने से रोकने के लिए प्रोत्साहन राशि के भुगतान के लिए 1200 करोड़ रुपये की मांग रखी थी. ये मांग केंद्र सरकार ने ठुकरा दी है. कृषि एंव किसान कल्याण विभाग ने ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे दाखिल किया है. केंद्र ने हलफनामे में कहा है कि पंजाब सरकार धान की पराली जलाने की घटनाओं को और ज्याददा काबू करने के लिए लिए हरियाणा सरकार की तरह अपने बजट संसाधनों से किसानों को प्रोत्साहन राशि देने पर विचार कर सकती है.

