֍:अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और म्यांमार से दालों का आयात§ֆ:लोगों की घरेलू जरूरत को पूरा करने के लए भारत 15 फीसदी दालों का आयात करता है. भारत का दालों का आयात वित्त वर्ष 2024 में 90 फीसदी बढ़कर 47.3 लाख टन हो गया. जबकि 2022-23 में यह 26.9 लाख टन टन था. अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया और म्यांमार से दालों का आयात कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने कहा कि घरेलू खरीफ फसल की संभावनाओं और अफ्रीका और म्यांमार से आयात में सुधार की रिपोर्ट के बाद पिछले कुछ हफ्तों में दालों, खासकर अरहर, उड़द और चना की कीमतों में नरमी आई है.§֍:उत्तर प्रदेश में गिरे दाम§ֆ:उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत दूसरी थोक मंडियों में दाल की कीमत में नरमी देखी गई है. लखनऊ मंडी में तुअर दाल का दाम 3 फीसदी लुढ़क गया है. यहां तुअर दाल 15320 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 15000 रुपये पर आ गया है. जबकि, मसूर दाल की कीमतों में भी नरमी दर्ज की गई है. एक्सपर्ट का मानना है कि कीमतों में अभी और नरमी आएगी. §֍:उत्पादन में हो सकती है बढ़ोतरी§ֆ:ज्यादातर घरों में इस्तेमाल होने वाली तुअर, उड़द और मसूर जैसी दालों का रकबा पुछले कुछ सालों में बढ़ गया है. ये 7.28 फीसदी से बढ़कर 12.51 मिलियन हेक्टेयर हो गया है. इससे 2024-25 सीजन में दालों के उत्पादन में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. इससे दालों की महंगाई में कमी आने की उम्मीद है. §भारत में इस समय त्योहारी सीजन चल रहा है. इस बार सीजन में दालों की कीमतों में भारी बदलाव देखा गया है. तूर दाल की थोक कीमतों में करीब 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है और मसूर दाल में भी नरमी आई है. दालों के तेज आयात और खरीफ सीजन में अच्छी उपज को देखते हुए आने वाले दिनों में दालों की महंगाई से और राहत मिलने की संभावना जताई गई है. केंद्र सरकार भी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उपभोक्ताओं को सहकारी समितियों के जरिए सस्ती कीमत पर चना दाल समेत अन्य दालें उपलब्ध करा रही है.

