֍:गोबर नहीं मिट्टी का होगा उपयोग §ֆ:जबकि दूसरी ओर यूपी सरकार गाय के गोबर से बने दिये जलाने के आदेश जारी कर रही है. इतना ही नहीं यूपी के पशुपालन विभाग के मंत्री ने खुद सीएम योगी आदित्यनाथ गाय के गोबर से बने दिये और दूसरी चीजें दी हैं. वहीं जानकारों का कहना है कि गोबर से बने दिये जलाने में परेशानी के साथ-साथ जोखिम भी है.
§֍:गाय के गोबर से दिये के लिए जारी हुआ ये आदेश §ֆ:22 अक्टूबर को प्रमुख सचिव, शासन ने एक पत्र जारी किया है. पत्र के मुताबिक गौशालाओं में गोपूजन के संबंध में कुछ जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं. ये सभी निर्देश विधायक, सांसद और मंत्रियों से जुड़े हैं. दिवाली को लेकर पुलिस को भी खास हिदायत दी गई है. पत्र के 6 नंबर पॉइंट पर खासतौर से गाय के गोबर से बने दिये, मूर्ति और दूसरी वस्तुओं का इस्तेमाल दिवाली पर करने की बात कही गई है. वहीं यूपी सरकार की ओर से जारी एक प्रेसनोट में बताया गया है कि पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने खुद जाकर सीएम योगी को प्रतीकात्मक रूप से गाय के गोबर से बने दिये भेंट किए हैं. क्योंकि अयोध्या में भी दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है तो वहां भी 1.5 लाख दिये गाय के गोबर से बने जलाए जाएंगे. §֍:28 लाख दियों में एक भी नहीं है गोबर से बना§ֆ:डॉ. राममनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी, अयोध्या की वाइस चांसलर प्रतिभा को रिकॉर्ड के लिए जलने वाले 28 लाख दियों को जलवाने की जिम्मेदारी दी गई है. तमाम कॉलेज, यूनिवर्सिटी और एनजीओ के लोगों को जोड़कर करीब 50 हजार से ज्यादा लोग दिये जलाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. लेकिन खास बात ये है कि 28 लाख दियों में एक भी दिया गाय के गोबर से बना नहीं है. बीते दो साल दिये जलवाने में नोडल अफसर की भूमिका निभाने वाले यूनिवर्सिटी के डीन और हैड प्रोफेसर आशुतोष सिन्हा ने किसान तक से बातचीत में बताया कि दिये जलाने का ये रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में दर्ज होता है.
उसी के हिसाब से इसकी तैयारी भी की जाती हैं. सबसे पहले हम लोगों ने दिये जलाने का बाबा राम-रहिम का रिकॉर्ड तोड़ा था. इसके बाद हर साल हम लोग खुद अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं. लेकिन ये सभी रिकॉर्ड मिट्टी से बने दिये के हैं. अब अगर इसमे गोबर से बने दिये शामिल किए जाते हैं तो रिकॉर्ड की कैटेगिरी ही अलग हो जाएगी. इसलिए 28 लाख दियों में एक भी दिया गोबर से बना शामिल नहीं किया गया है.
§वैसे तो यूपी सरकार की योजना के मुताबिक 35 लाख दिये जलाने का प्लान बनाया गया है. खास बात ये है कि इसमे से 28 लाख दिये जलाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया जाएगा. वहीं 28 लाख दिये जलाने की जिम्मेदारी डॉ. राममनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी को दी गई है. लेकिन रिकॉर्ड के लिए जलने वाले 28 लाख दियों में एक भी दिया गोबर से बना नहीं होगा. हालांकि इसके पीछे भी रिकॉर्ड से जुड़ी ही एक वजह है.

