֍:पूरी जानकारी§ֆ:छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और आयुर्वेद को लेकर जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं. इसक लेकर राज्य के धमतरी जिले के सिंहपुर गांव में आयुर्वेदिक चिकित्सा और प्रकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए बूटी गढ़ की स्थापना की गई है. इसे लेकर सीएम वीडी साई ने निर्देश दिए. इसके तहत बूटी गढ़ में आयुष रस शाला भी बनाई जा रही है. इसमें औषधीय पौधों के रस का इस्तेमाल सेहत को दुरुस्त रखने में किया जाएगा.§֍:§ֆ:आयुर्वेद में पानी का बहुत महत्व होता है. पानी शरीर के सभी प्रमुख तत्वों को संतुलित रखता है. इसके मद्देनजर धमतरी जिले में “जल जगार” कार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण के साथ आयुर्वेदिक टॉनिक और औषधियों की उपयोगिता को भी प्रदर्शित किया गया. इसमें उपस्थित आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने बूटी गढ़ और रस शाला के महत्व को उजागर करते हुए बताया कि कैसे एक परिवार और समाज, शुद्ध पानी और आयुर्वेदिक खान पान से हेल्दी लाइफस्टाइल अपना सकते हैं.§֍:बूटी गढ़ में लगे 25000 पौधे§ֆ:बूटी गढ़ की जानकारी देते हुए आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवध पचौरी ने बताया कि बूटी गढ़ में 160 प्रकार की बूटियों के 25,000 पौधे लगाए गए हैं. इनमें से कुछ ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं, जिनका इस्तेमाल आयुर्वेदिक उपचार के लिए चूर्ण या टैबलेट बनाकर किया जा रहा है. साथ ही विलुप्त हो रही जड़ी-बूटियों को भी बूटी गढ़ में सहेजा जा रहा है, ताकि भविष्य में इन पर शोध हो सके.§छत्तीसगढ़ सरकारकी ओर से आय़ुर्वेद में सुझाए गए उपचार क उपायों के लिए जड़ी बूटियों के संग्रह को आजीविका के माध्यम के तौर पर पेश किया है. राज्य में आयुर्वेद चिकित्सा को प्रभावी बनाने के लिए विष्णुदेव साय सरकार ने आयुर्वेद उपचार के प्रमुख केंद्र के रूप में ‘बूटी गढ़’ स्थापित किया है. ये गढ़ धमतरी जिले में स्थापित किया गया है, जहां जल संरक्षण और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का अनोखा समन्वय देखने को मिलेगा. इसमें एक ‘रस शाला’ भी बनाई गई है.

