֍:सरकार ने जारी किया बयान§ֆ:मध्य प्रदेश सरकार ने इसको लेकर एक आधिकारिक बयान दिया है. जिसमें उन्होंने कहा, “राज्य सरकार आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के खंड 3.2 और भारत सरकार, गृह मंत्रालय (आपदा प्रबंधन) के पत्र क्रमांक 33-03-2021-एनडीएम-I, दिनांक 12 जनवरी 2022 द्वारा जारी राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के गठन और प्रशासन पर दिशानिर्देशों के अनुसार लू (तापघात) को स्थानीय आपदा के रूप में अधिसूचित करती है.”§֍:2024 की गर्मियों में हुईं 100 मौतें§ֆ:इस साल गर्मियों के दौरान तापमान में काफी बढ़ौतरी देखी गई थी. जिस कारण कई मौतें भी हुईं. बता दें कि इस साल 1 मार्च से 19 जून के बीच देश में हीटवेव के कारण 114 लोगों की जान गई थी. वहीं, 40,000 से अधिक संदिग्ध हीटस्ट्रोक के मामले सामने आए थे. 19 जून 2024 तक हीटस्ट्रोक के कारण सबसे अधिक मौतें उत्तर प्रदेश में 37, बिहार में 17, राजस्थान में 16 और ओडिशा (13) में हुईं थीं. हीटवेव को लेकर अलग-अलग परिभाषाए हैं.§֍:कितने तापमान को हीटवेव कहते हैं?§ֆ:हीटवेव को विशव मौसम विज्ञान संगठन ने पांच या पांच से ज्यामदा दिनों तक अधिकतम तापमान औसत अधिकतम तापमान से पांच डिग्री सेल्सियस ज्यालदा रहता है तो इसे हीटवेव कहा जाता है. आईएमडी मौसम स्टेसशन पर मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या अधिक तापमान, पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री सेल्सियस या अधिक तापमान और समुद्र तटीय क्षेत्रों में 37 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान होने पर हीटवेव की श्रेणी में दर्ज करता है.§भारत में मध्य प्रदेश हर क्षेत्र में तेजी से सामने आ रहा है. इस वजह से मध्य प्रदेश अक्सर सुर्खियों में दिखता है. अब मध्य प्रदेश में मौसम को लेकर भी एक बड़ा फैसला किया गया है. यहां गर्मियों के मौसम में कई लोगों को लू लग जाती है, जिस कारण लोगों की मृत्यु भी हो जाती है. ऐसे में अब मध्य प्रदेश सरकार ने लू को स्थाानीय प्राकृतिक आपदाओं की सूची में शामिल कर लिया है. इसके बाद हीटवेव मृतकों को अन्य प्राकृतिक आपदाओं की तरह मुआवजा दिया जाएगा. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यब सरकार को बदलाव का निर्देश दिया था, जिसके एमपी सरकार ने अधिसूचना जारी की.

