֍:खाद्यान्न और दूध उत्पादन में यूपी नंबर 1§ֆ:भारत में उत्तर प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का 166 लाख हेक्टर रकबा है, जो कि देश में सर्वाधिक है. प्रदेश के करीब 3 करोड़ परिवारों की आजीविका कृषि पर निर्भर हैं. उत्तर प्रदेश खाद्यान्न और दूध के उत्पादन में देश में नंबर एक, फलों और फूलों के उत्पादन में दूसरे और तीसरे नंबर पर है. बीज के लिए प्रदेश को दूसरे राज्यों से मांग करनी पड़ती है. जिससे हर साल करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं. आंकड़ों के अनुसार गेहूं के 22 फीसदी, धान के 51 फीसदी, मक्का के 74 फीसदी, जौ के 95 फीसदी, दलहन के 50 फीसदी और तिलहन के 52 फीसदी बीज गैर राज्यों से आते हैं.§֍:सरकार की पांच पार्क बनाने की योजना§ֆ:योगी सरकार ने बीज उत्पादन की एक व्यापक योजना तैयार की है. इसके तहत प्रदेश के नौ कृषि जलवायु क्षेत्रों में होने वाली फसलों के मद्देनजर पांच बीज पार्क (वेस्टर्न जोन, तराई जोन, सेंट्रल जोन, बुंदेलखंड और ईस्टर्न जोन) पीपीपी मॉडल पर बनाए जाएंगे. हर पार्क का रकबा न्यूनतम 200 हेक्टेयर का होगा. कृषि विभाग के पास बुनियादी सुविधाओं के साथ ऐसे छह फार्म उपलब्ध हैं. इसमें से दो फार्म 200 हेक्टेयर, दो फार्म 200 से 300 और दो फार्म 400 हेक्टर से अधिक के हैं. राज्य सरकार इनको इच्छुक पार्टियों को लीज पर दे सकती है.§֍:बीज अनुपलब्धता यूपी किसानों की प्रमुख समस्या§ֆ:उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक सिंचित रकबे की बात करें तो प्रति हेक्टेयर प्रति कुंतल उपज के मामले में अभी भी राज्य पीछे है. साथ ही क्वालिटी के बीजों की अनुपलब्धता भी एक प्रमुख वजह है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में गेहूं का प्रति हेक्टेयर प्रति कुंतल उत्पादन 26.75 कुंतल है, जबकि पंजाब का सर्वोच्च 40.35 कुंतल है. इसी तरह धान का उत्पादन 37.35 कुंतल है, जबकि हरियाणा का 45.33 कुंतल है. अन्य राज्यों की तुलना में इसी तरह का अंतर चना और सरसों के उत्पादन में भी है. §उत्तर प्रदेश में किसानों को गुणवत्ता वाले बीज के लिए दूसरे राज्यों से खरीदी करनी पड़ती है. लेकिन अब योगी सरकार ने किसानों को बड़े पैमाने पर राज्य में ही बीज उत्पादन की रणनीति तैयार की है. इससे किसानों को अच्छे उत्पादन के लिए राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हो जाएंगे. जिससे किसानों को लाभ होगा. ऐसे में उन्हें किसी प्रकार के फर्जीवाड़े का भी डर नहीं होगा.

