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जानें बकरी प्लेग और चेचक के बारे में..
§ֆ:बकरी पालन के दौरान बदलते मौसम में सर्दियां सबसे ज्यादा जानलेवा होती हैं. इस दौरान बकरियों को पीपीआर, चेचक जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती हैं. पीपीआर एक तरीके की विषाणु जनित बीमारी है जो खुद के साथ दूसरी बकरियों को भी अपनी चपेट में ले लेती है. इसके तरह से बकरियों में चेचक भी फैलती है. चेचक के होने पर बकरियों के शरीर पर चकते से बन जाते हैं. इसलिए ये जरूरी है कि सर्दी शुरू होते ही बकरियों को पीपीआर और चेचक का टीका लगवा दिया जाए. सितम्बर के आखिर से ही टीके लगवाने की शुरुआत की जा सकती है. क्योंकि ये बीमारी अगर एक बकरी में हो गई तो फिर दूसरी बकरियों के बीच तेजी से फैलती है. §֍:ऐसे करें पहचान§ֆ:बकरियों में प्लेग की बीमारी को पहचानने के लिए कुछ लक्षण हैं. जिसमें सबसे पहले बकरियों की ग्रोथ रुक जाती है. इसके बाद बकरी को दस्त लग जाते हैं, निमोनिया हो जाता है और नाक बहने लगती है. बकरी को तेज बुखार आ जाता है. बकरियों से यह बीमारी उनके मेमनों को भी लग जाती है. इसी तरह से बकरी को चेचक होने पर भी निमोनिया की शिकायत होने लगती है. तेज बुखार आ जाता है. बकरी चारा खाना छोड़ देती है. बकरी के बच्चे भी दूध कम पीने लगते हैं. §֍:ऐसे करें रोकथाम§ֆ:पशु चिकित्सकों के मुताबिक ये बीमारियां सर्दी में फैलने लगती हैं, तो सितंबर के अंत आते ही पशुओं को टीके लगवाना शुरु कर दें. इससे बकरी की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाएगी. बकरियों के लिए पशु पालकों को सलाह दी जाती है कि उन्हें पहले ही प्लेग और चेचक के टीके लगवा दें. क्योंकि टीके लगवाने का खर्च बहुत ही मामूली होता है. और तो और सरकारी पशु चिकित्सा केन्द्रों पर तो यह फ्री में लगते हैं. जबकि टीकों के मुकाबले इनके इलाज पर बड़ी रकम खर्च हो जाती है. दूसरा सबसे बड़ा काम ये करना चाहिए कि जो भी बकरी चेचक और प्लेग से पीडि़त हो तो उसे झुंड की दूसरी बकरियों से अलग कर दें. §भारत में कई किसान पशुपालन की ओर बढ़ रहे हैं. इसमें केवल गाय-भैंस ही नहीं बल्कि बकरियां भी शामिल हैं. पशुपालन में सबसे बड़ी दिक्कत मौसम के बदलाव में आती है. इस दौरान बकरियों को कई प्रकार के रोग लग जाते हैं. इसी के साथ रोग के संक्रमण के बढ़ने पर पशु की मृत्यु भी हो सकती है. ऐसे में सर्दियों के मौसम में इस टीके को लगवाने के बाद आपकापशु सुरक्षित हो जाएगा. पढ़ें पूरी खबर..

