֍:जानें क्या है पूरी बात?§ֆ:कंगना रनौत अपने बयान को लेकर तर्क दिया कि तीनों कानून किसानों के लिए फायदेमंद थे, लेकिन कुछ राज्यों में किसान समूहों के विरोध के कारण सरकार ने उन्हें निरस्त कर दिया. उन्होंने कहा, “किसान देश के विकास में ताकत का स्तंभ हैं. मैं उनसे अपील करना चाहती हूं कि वे अपने भले के लिए कानून वापस मांगें.” दूसरी ओर, कांग्रेस ने रनौत की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि पार्टी ऐसा कभी नहीं होने देगी.§ֆ:केंद्र सरकार किसानों के लिए तीन कृषि कानून लेकर आई थी जिसका भारी विरोध हुआ था. बाद में सरकार को इन कानूनों को वापस लेना पड़ा और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बारे में बयान देना पड़ा था. मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई किसानों को डर था कि इन सुधारों से कॉर्पोरेट शोषण होगा और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खत्म हो जाएगा. बाद में दिल्ली की सीमाओं पर एक साल से अधिक समय तक विरोध प्रदर्शन के बाद, नवंबर 2021 में कानूनों को निरस्त कर दिया गया. सरकार ने किसानों के साथ आम सहमति बनाने में विफलता को इसका कारण बताया.§֍:कांग्रेस ने कही ये बात§ֆ:कंगना रनौत के बयान के बाद कांग्रेस ने उनपर निशाना साधते हुए कहा कि, ‘अब BJP के सांसद फिर से इन कानून की वापसी का प्लान बना रहे हैं. कांग्रेस किसानों के साथ है. इन काले कानून की वापसी अब कभी नहीं होगी, चाहे नरेंद्र मोदी और उनके सांसद जितना जोर लगा लें.’ §कृषि कानूनों की चर्चा में मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत के बयान से सुर्खियां बन रही हैं. उन्होंने कृषि कानून किसानों द्वारा वापस लेने के लिए बयान दिया है. इसमें उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानून किसान हितैषी थे और किसानों को केंद्र सरकार से तीनों कानूनों को वापस लाने की मांग करनी चाहिए. किसानों के जो हितकारी घाटे हैं उन्हें पूरा किया जाना चाहिए. इसके लिए किसानों को भी चाहिए कि वे अपनी आवाज को उठाएं क्योंकि वे देश के अन्नदाता हैं और उन्हें अपनी बात रखने के लिए आगे आना चाहिए.

