֍:MSP कानून को लेकर केंद्र को घेरा§ֆ:महापंचायत में आए किसान नेताओं ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने 2011 में MSP गारंटी कानून बनवाने के लिए तत्कालीन पीएम डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखा था, लेकिन 2014 में सत्ता में आने के बाद उन्हें 10 साल बीत गए हैं और अभी भी MSP गारंटी कानून नहीं बनाया गया है. यह किसानों के साथ भाजपा की सबसे बड़ी वादाखिलाफी है.
किसान नेताओं ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी की किसान-विरोधी नीतियों के कारण 2020 और 21 में आंदोलन के दौरान हमारे 833 किसानों ने जान गंवाई थी. इस बार आंदोलन में 33 किसानों की जान जा चुकी है जबकि 433 किसान घायल हो चुके हैं. किसान नेताओं ने कहा कि हमारा आंदोलन सांसद या विधायक बनने और बनाने के लिए नहीं है, बल्कि हमारा आंदोलन भावी पीढ़ियों के भविष्य, रोटी और बेटी के सम्मान की रक्षा के लिए है.
§बड़ी संख्या में किसान लगातार एमएसपी गारंटी कानून और अन्य मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं. कई किसान संगठन अलग-अलग जगह समय-समय पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी क्रम में उचाना अनाज मंडी में भी एक किसान संगठन और किसान मजदूर संगठन ने महापंचायत बुलाई, जिसमें किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला. अब अगली महापंचायत 22 सितम्बर को कुरुक्षेत्र के पिपली अनाज मंडी में होगी.
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बुलावे पर उचाना में रविवार को किसानों और मजदूरों की महापंचायत हुई. इस पंचायत में हजारों की संख्या में किसान व मजदूर शामिल हुए. किसानों ने आरोप लगाया कि महापंचायत से पहले हरियाणा पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी किए और टेंट-साउंड वालों को भी धमकाया कि वे किसानों को टेंट और साउंड उपलब्ध न कराएं. वहीं, किसानों ने कहा कि पुलिस ने सुबह मंडी के गेट भी बंद कर दिए थे.

