֍:नहीं किया पोर्टल पर अपडेट तो होगी कार्यवाही§ֆ:केंद्र सरकार ने सभी गेहूं भंडारण संस्थाओं को गेहूं स्टॉक सीमा पोर्टल https://evegoils.nic.in/wsp/login पर रजिस्ट्रेशन करने का निर्देश दिया है. इसमें हर शुक्रवार को स्टॉक की स्थिति को अपडेट करना होगा. अगर कोई भी संस्था जो पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराती है या स्टॉक सीमा का उल्लंघन करती है, उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 6 और 7 के तहत कार्रवाई की जाएगी. अगर संस्थाओं के पास उपरोक्त निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक है, तो उन्हें अधिसूचना जारी होने के 15 दिनों के भीतर इसे निर्धारित स्टॉक सीमा तक लाना होगा. केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी इन स्टॉक सीमाओं की बारीकी से निगरानी करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश में गेहूं की कोई कृत्रिम कमी न पैदा हो. §֍:इतना है गेहूं का दाम§ֆ:उपभोक्ता मामले मंत्रालय के प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन के मुताबिक 13 सितंबर को देश में गेहूं का औसत दाम 31.06 रुपये, अधिकतम 58 और न्यूनतम 22 रुपये प्रति किलो है. वहीं, एमएसपी की कीमत 22.75 रुपये प्रति किलो है. इसी तरह गेहूं के आटे का दाम भी आसमान पर पहुंच गया है. देश में आटा का औसत दाम 35.97, अधिकतम 70 और न्यूनतम 28 रुपये प्रति किलो रहा. सरकार कहीं न कहीं यह मानकर चल रही है कि जमाखोरी की वजह से दाम बढ़ रहा है. §֍:प्या ज एक्सपोर्ट किया बड़ा फैसला§ֆ:गेहूं के साथ केंद्र सरकार ने बासमती और प्यायज के दामों को लेकर भी बड़ा फैसला किया है. इस पर लगाए गए 550 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) की शर्त को हटा दिया गया है. प्याज के साथ-साथ केंद्र सरकार ने बासमती चावल को लेकर भी इसी तरह का फैसला लिया है. बताया गया है कि बासमती चावल पर लगी 850 डॉलर प्रति टन की एमईपी भी हटा ली गई है. §֍:§भारत में परंपरागत खेती से कई किसानों का परिवार जुड़ा हुआ. इसकी बाजार में अधिक डिमांड है, क्योंकि रसोइयों में बाकी फसलों से ज्यादा गेहूं का उपयोग हो रहा है. इसी के चलते कई गेहूं भंडारण संस्थाएं किसान से गेहूं लेकर अत्यधिक स्टॉक कर लेते हैं. इससे कीमतों में इजाफा होता है. ऐसे जमाखोरों को देखते हुए केंद्र सरकार ने गेहूं पर नई स्टॉक लिमिट को संशोघित कर दिया है. यह सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 31 मार्च 2025 तक लागू रहेगी. रबी 2024 के दौरान कुल 1129 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन दर्ज किया गया. वहीं, मांग लगभग 1001 लाख टन की ही है.

