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Home कृषि समाचार

हरियाणा में गन्ने की फसल में आ रही समस्या, कृषि वैज्ञानिकों ने किया निरीक्षण

Fiza by Fiza
September 12, 2024
in कृषि समाचार
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हरियाणा में गन्ने की फसल में आ रही समस्या, कृषि वैज्ञानिकों ने किया निरीक्षण
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֍:हरियाणा के कई जिलों में कृषि वैज्ञानिकों ने गन्ने की फसल में समस्या देखी हैं. इसमें कई तरह के कीट पाए गए, जो फसल को रोगग्रस्त करके नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्विद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, उचानी व करनाल के कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने गांव-गांव में जाकर फसल का निरीक्षण किया. निरीक्षण के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से चर्चा कर उन्हें रोकथाम के तरीके साझा किए. §ֆ:क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र उचानी व करनाल के कृषि वैज्ञानिकों की टीम में डॉ. महा सिंह, डॉ. हरविंदर सिंह, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. विजेता गुप्ता व डॉ. रमेश जांगड़ा शामिल रहे. कृषि वैज्ञानिकों ने चीनी मिल के अधिकारी रोहतास लाठर, मनोज कुमार व रणबीर सिंह के साथ क्षेत्र में गन्ने की फसल का निरीक्षण किया. निरीक्षण किए गांव में करतारपुर, इस्माइलपुर व तलाकौर शामिल हैं, यहां पत्तियों में पीलेपन, काली कीड़ी, माइट, तराई बेधक व चोटी कीटों का प्रकोप अधिक था. §֍:ये निकली समस्या§ֆ:वैज्ञानिकों से बातचीत में सामने आया कि उनके पास पहले से गन्ने की पत्तियों में पीलेपन आने की शिकायतें आ रही थीं. निरीक्षण के दौरान गन्ने में ब्लैक बग, माइट, तराई बेधक व चोटी बेधक कीटों के प्रकोप के साथ सोका रोग के लक्षण भी मिले. समस्या की गंभीरता के मद्देनजर उन्होंने किसानों को इसकी रोकथाम के उपाय जल्द से जल्द करने की सलाह दी. इस दौरान कई प्रगतिशील किसान भी मौजूद रहे. §֍:वैज्ञानिकों ने बताए उपाए§ֆ:कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि काली कीड़की रोकथाम के लिए फेंजाल दवाई 400 मिली. का 400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. इसी के साथ तराई बेधक की रोकथाम के लिए अंडे के परजीवी का प्रयोग करने की सलाह दी गई. उन्होंने बताया कि एक ट्राइको कार्ड को प्रति एकड़ की दर से चार बार प्रति महीना छोड़ें. इसी के साथ सोका रोग की समस्या के निदान के लिए कार्बेन्डाजिम दवाई की सिफारिश के साथ ट्रायकोडरमा का प्रयोग करने की सलाह दी.§֍:कैसे होती है रूटबोरर से रोकथाम?§ֆ:इसको लेकर हरियाणा के करनाल के पादप रोग वैज्ञानिक डॉ. हरविंद्र सिंह यादव ने बताया कि रूटबोरर की रोकथाम के लिए खेत में इंसेक्टीसाइड का उपयोग करना सबसे बेहतर है. §֍:लखनऊ के गन्ना एंव चीनी कार्यालय की ओर से जारी की गई एडवाइजरी§ֆ:गन्ना एंव चीनी कार्यालय आयुक्त, लखनऊ द्वारा एडवाइजरी जारी की गई है. इसमें बताया गया कि बारिश कम होने के कारण गन्ने की फसल में कई बीमारियां आ जाती हैं. ऐसे में गन्ने की पत्तियों में पीलापन या जड़कीट रूटबोरर का लगना सामान्य बात है, लेकिन इससे फसल पर काफी प्रभाव पड़ता है. गन्ने में पीली पत्तियों की समस्या विल्ट या उकठा रोग की वजह से होती है. §ֆ:इसी के साथ जड़ बेधक या रूटबोरर कीट की रोकथाम के लिए किसानों को एडवाइजरी में बताया गया कि फिप्रोनिल 0.3 जी का 10-12 किलोग्राम प्रति एकड़ अथवा क्लोरपाइरीफास 20 ई.सी. 02 लीटर या क्लोरापाइरीफास 50ई.सी. 01 लीटर या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल 200 मिली या बाइफ्रेन्थिन 10 ई.सी. 400 मिली. प्रति एकड़ की दर से 750 लीटर पानी के साथ मिलाकर ड्रेन्चिंग करें. इसके बाद फसल में सिंचाईं करें. एडवाइजरी में बताया गया कि जड़ों के पास मृदा वातावरण में लाभदायी सूक्ष्म जीवों की क्रियाशालता सुनिश्चितच करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग बिल्कुल न करें.§हरियाणा के कई जिलों में कृषि वैज्ञानिकों ने गन्ने की फसल में समस्या देखी हैं. इसमें कई तरह के कीट पाए गए, जो फसल को रोगग्रस्त करके नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्विद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, उचानी व करनाल के कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने गांव-गांव में जाकर फसल का निरीक्षण किया. निरीक्षण के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से चर्चा कर उन्हें रोकथाम के तरीके साझा किए.

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