֍:ये जारी हुई एडवाइजरी§ֆ:मक्का की बेबी कॉर्न, स्वीट कॉर्न और चारे के लिए एडवाइजरी जारी की गई है. इस समय बीजाई की गई स्वीट कॉर्न की पैदावार और क्वालिटी दोनों ही अच्छी रहती हैं. साथ ही बाजारों में त्योहार और शादी के सीजन को देखते हुए इसकी डिमांड भी अधिक होती है. इन फसलों के लिए मक्का की बिजाई से पहले मिट्टी का परीक्षण जरूर कराएं. अधिक पैदावार लेने के लिए अच्छी गली-सड़ी गोबर की खीद 60 प्रति एकड़ की दर से खेत की तयारी से पहले डालें. सामान्य दशाओं में 50 किलोग्राम डीएपी, 40 कि.ग्राम एमआपी और 37 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग बुवाई के समय करें. मक्का फसल अगर फूल या भुट्टा बनने की अवस्था में आ गई हो तो उसमें खाद की अंतिम खुराक एक तिहाई यूरिया के हिसाब से कतारों में डाल लें.§֍:ऐसे करें खरपतवार नियंत्रण§ֆ:खरपतवार नियंत्रण के लिए 400-600 ग्राम एट्राजिन प्रति एकड़ 200-250 लीटरपानी में घोलकर बिजाई के तुरंत बादल या खरपतवार अंकुरण होने से पहले छिड़काव करें. मक्का के जमाव से पहले अगर एट्राजिन का छिड़काव नहीं किया है तो आप बिजाई के 10-15 दिनों बाद या खरपतवार 2-3 पत्ते की अवस्था में टेम्बोट्रायोन का 115 मि.ली. तैयार शुद्ध मिश्रण व 400 मिली चिपचिपे पदार्थ को 200 लीटर पानी में घोकर बना लें और प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें.§֍:ऐसे करें कीट प्रबंधन§ֆ:फॉली आर्मीवर्म कीट मक्का का सर्वाधिक हानिकारक कीट है. इस कीट की सुंडी पौधों को नुकसान पहुंचाती है और सूंडी को किसान आसानी से पहचान सकते हैं. इसकी पहचान के लिए पत्तों पर लंबे कागजी या गोल से आयताकार कटे-फटे छिद्रों द्वारा की जाती है. सूंडी पौधे की गोभ में काफी मात्रा में मलमूत्र छोड़ती है. इसकी रोकथाम के लिए एक एकड़ में 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं. साथ ही खेत में प्रभाव दिखते ही सूखी रेत व चूने का मिश्रण 9:1 के अनुपात में डालें. इसकी छोटी से रोकथाम के लिए अजाडीरैक टिन 1500 पीपीएम का छिड़काव 1 लीटर प्रति एकड़ की दर से करें. इसके बाद बड़ी सुंडी की रोकथाम के लिए क्लारेनेट्रानिलीप्रोल 18:5 एससी 80 मिली या एमामेक्टिन बेंजोएट 80 ग्राम या स्पाईनटेरोम 11:7 एससी 100 मिली प्रति एकड़ को 200 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ की दर से गोभ में छिड़काव करें. §֍:फॉली आर्मीवर्म कीट मक्का का सर्वाधिक हानिकारक कीट है. इस कीट की सुंडी पौधों को नुकसान पहुंचाती है और सूंडी को किसान आसानी से पहचान सकते हैं. इसकी पहचान के लिए पत्तों पर लंबे कागजी या गोल से आयताकार कटे-फटे छिद्रों द्वारा की जाती है. सूंडी पौधे की गोभ में काफी मात्रा में मलमूत्र छोड़ती है. इसकी रोकथाम के लिए एक एकड़ में 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं. साथ ही खेत में प्रभाव दिखते ही सूखी रेत व चूने का मिश्रण 9:1 के अनुपात में डालें. इसकी छोटी से रोकथाम के लिए अजाडीरैक टिन 1500 पीपीएम का छिड़काव 1 लीटर प्रति एकड़ की दर से करें. इसके बाद बड़ी सुंडी की रोकथाम के लिए क्लारेनेट्रानिलीप्रोल 18:5 एससी 80 मिली या एमामेक्टिन बेंजोएट 80 ग्राम या स्पाईनटेरोम 11:7 एससी 100 मिली प्रति एकड़ को 200 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ की दर से गोभ में छिड़काव करें. §ֆ:मक्का में पत्ता अंगमारी, शीथ अंगमारी, तना गलन, जैसी बीमारियों का आना संभव है. इस दौरान पत्ता अंगमारी में प्रभावित पत्तों पर मोतीनुमा या सीधे, निरंतर लंबे स्लेटी और भूरे रंग के हरे पीले प्रभामण्डलवाले धब्बे देखे जा सकते हैं. शाथ अंगमारी रोग पत्तियों, शाथ, डंठल पर विकसित होता है और छल्ली तक पहुंच सकता है. इसके लक्षण में डंठल से पानी जैसे सफेद या भूरे रंग के धब्बे बनना, डंठल का टूटना, सिल्क का अकड़ना और टूटना, दोनों पर धब्बे बनना आदि शामिल है. संक्रमण बढ़ने के साथ हल्के भूरे रंग की फफूंदी के साथ छोटे गोल सरसों के बीज के आकार के काले रंग के स्क्लेरोशिया देखे जा सकते है. तना गलन में पौधे का निचला भाग नरम व बदरंग दिखाई देने लगता है. इसके साथ पत्ते मुरझाने लग जाते हैं और पौधा गिर जाता है. इसकी रोकथाम के लिए प्रभावित पौधों को उखाड़ दें. इसके उपचार के लिए 600 ग्राम जीनबे या मैकोंजेब को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. अगर आपको कोई सुधार न दिखे तो इस क्रिया को 10 से 15 दिनों के अंतराल पर दोहराएं. इसके अलावा 150 ग्राम कैप्टन, 33 ग्राम स्टब्बल ब्लीचिंग पाउडर 100 लीटर पानी के घोल से पौधों की जड़ों के पास मिट्टी गीली करें. मक्के की 30-35 दिन पुरानी फसल में पौधों की निचली 2-3 पत्तियों को तोड़ने से रोग नियंत्रण किया जा सकता है. §हरियाणा में कई फसलों में समस्या को लेकर कृषि वैज्ञानिक लगातार सुधार का प्रयास कर रहे हैं. वर्तमान में मक्का की फसल में फूल और भुट्टा आने की अवस्था बन रही है. इसमें पौधों को पोषक तत्वों और सिंचाई की काफी ज्यादा जरूरत होती है. इस मानसून में अधिक बारिश के कारण पानी की निकासी और मक्का की सिंचाई करना अत्यंत जरूरी है. इस समय कीटों व बीमारियों का प्रकोप होने पर उसका प्रबंधन आवश्यक है. इसलिए किसानों को आने वाले 15 दिनों के लिए हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है.

