֍:ड्रैगनफ्रूट की केती में क्या समस्या आती हैं और इसका निवारण कैसे किया जाए?§ֆ:ड्रैगनफ्रूट हमारे क्षेत्र के लिए नया फल है। हमारे क्षेत्रों में आम, अमरूद जैसे फलों की भारी मात्रा में खेती की जा रही है। अब धीरे-धीरे किसान नई फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में ड्रैगनफ्रूट भी किसानों के बीच तेजी से बढ़ने वाला है, क्योंकि इसकी डिमांड ही तेजी की वजह है। हमारे केंद्र में ड्रैगनफ्रूट की लाल गूदे वाले किस्म लगी हुई है, जो कि रोग प्रतिरोधक क्षमता में काफी ज्यादा आगे है। इसको लगाने का तरीका और जलवायु दोनों इस फल के अनुकूल है। हमारे यहां के कई किसानों ने ड्रैगनफ्रूट की खेती भी शुरु कर दी है। अभी तक के अनुभव में किसानों को ड्रैगनफ्रूट की खेती करने में कोई दिक्कत नहीं आई है। §֍:ड्रैगनफ्रूट की खेती किस तरह से की जाती है?§ֆ:इसकी खेती करने के लिए हम सात फुट का सीमेंट से बना पोल लेते हैं। इस पोल को 1.5 फीट जमीन में गाढ़ा जाता है और बाकी 5.5 फीट जमीन से ऊपर रहता है। इसमें हम एक पोल पर चार पौधे लगाते हैं। इसका पौधा आप किसी भी नर्सरी से ले सकते हैं। अगर नर्सरीमें उपलब्ध नहीं है तो ऑनलाइन भी मंगा सकते हैं। एक बीघा में ड्रैगनफ्रूट के लगभग 200 पोल लग जाते हैं। दूरी की बात करें तो इनके बीच में दो से 2.5 मीटर की दूरी रहती हैं। वहीं, लाइन में इसकी दूरी 10-12 फीट तक होती है। इतना ज्यादा दूरी के कारण ट्रैक्टर जैसी चीजों को खेत में लाने में कोई दिक्कत नहीं आती। खपतवारोंको हम जुताई के माध्य से कम कर सकते हैं। एक और महत्वपूर्ण बात कि इसका चुनाव करते समय हमें ऐसे स्थान का चयन करना है जहां पानी न ठहरे, क्योंकि इसके पौधे को नमी चाहिए, पानी नहीं। अगर इसे पानी दिया जाए तो फल सड़ सकता है क्योंकि ये कैक्टस की प्रजाति है। ये ऐसे क्षेत्रों का है जहां पानी कम चाहते हैं। ये केवल नमी में ही उगजाता है। तो अगर हमारा कोई ऐसा क्षेत्र है जहां पानी लंबे समय तक ठहरता हो ऐसी जगह का हमें चयन नहीं कना है। मिट्टी की बात करें तो बलुई या दोमट मिट्टी इसके लिए अच्छी रहती है। दूसरी चीज, जब हम इसके पोल को लगाएं तो वहां खेत को 9 इंच ऊंचा कर दें, क्योंकि बरसात के दिनों में कब पानी बरस जाए उसका अंदाजा नहीं होता । खेत को ऊंचा करने का केवल यही उद्देश्य है। हमारे किसान भाई अगर इसका पौधा लगाते हैं तो ऊंचा करके लगाएं। लगाते समय मिट्टी में गोबर की अच्छी सड़ी हुई खाद के साथ डीएपी और फंजीसाइड को डालें। फंजीसाइड में आप कॉपरऑक्सीक्लोराइड को भी ले सकते हैं। एक पोल की बात करें तो एक पोल में 4-5 किलो ग्राम अच्छी सड़ी हुई खाद की जरूरत होती है। साथ ही 40-50 ग्राम डीएपी और 4-5 ग्राम कारबन डाइजीम या कॉपरऑक्सीक्लोराइड को पौधे के पास की मिट्टी में मिला दें। उसके बाद पौधे की रोपाई कर दें। रोपाई के वक्त किसान पॉलीथीन को निकालकर ली लगाएं। पॉलीथीन न हटानेके कारण पौधे अच्छे से बढ़ नहीं पाता। पौधे की रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई कर दें। पानी उतना ही डालें कि 1-1.5 घंटे में जमीन उसे सोख ले नहीं तो पौधे में सड़न आ जाएगी। §भारत की जनसंख्या में 49 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है। जिसमें 195 मिलियन हेक्टेयर में की जाती है। इसमें बागवानी का भी काफी योगदान है। ये एक उभरता हुआ कृषि व्यवसाय है, जिसमें मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, फूलों और फलों की खेती, चाय बागान आदि की खेती की जाती है। इसी के चलते उत्तर प्रदेश के बागपत में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. अनंत कुमार से फसल क्रांति ने ड्रैगनफ्रूट की खेती पर बातचीत के पेश हैं मुख्य अंश…

