֍:कब करें डाई का उपयोग§ֆ:इसको लेकर केवीके पीलीभीत के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अमरजीत राठी ने बताया कि फसल में डाई यानी डीएपी जिसे डाई अमोनियम फास्फेट के नाम से जाना जाता है. डीएपी के 50 KG के पैकेट में 46% फास्फोरस और 18 % नाइट्रोजन होता है. किसान भाई अगर इसका प्रयोग रोपाई के वक्त करें तो यूरिया की भी बचत हो सकती है. एक पैकेट यूरिया में 46% नाइट्रोजन की मात्रा होती है. डीएपी का उपयोग बुवाई के समय कर सकते हैं. जब 50-60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से डाई यानी डीएपी का उपयोग करना फायदेमंद होता है. यह फॉस्फोरस और नाइट्रोजन की जरूरत को पूरा करता है, जो पौधों की जड़ें मजबूत बनाने में मदद करता है. दूसरी बार डाई का उपयोग रोपाई के 20-25 दिन बाद किया जाता है. इस समय पौधे की जड़ें विकसित हो चुकी होती हैं, और इस समय दिए गए डाई से पौधों को पोषण मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि में सुधार होता है.§֍:एक बार करें डीएपी का छिड़काव§ֆ:
धान की फसल में सितंबर में डीएपी कुछ किसान इस्तेमाल करते हैं. लेकिन ऐसा नहीं करना है. क्योंकि इसका मुख्य काम जड़ को मजबूत करना है. सितंबर माह के आसपास जड़ों को मजबूत करने की कोई जरूरत ही नहीं है. ऐसे में इसके फायदे कम नुकसान ज्यादा देखने को मिल सकते हैं. सिर्फ एक बार ही प्रयोग कर सकते हैं. डाई की मात्रा कम रहती है, तो पौधों को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं. इससे पौधों की वृद्धि में कमी आ सकती है और फसल कमजोर हो सकती है.
§भारत में ज्यादातर किसान मुख्य रूप लसे धान की खेती करते हैं. इसमें किसानों की रूची भी काफी ज्यादा है, जिसके बाद दनिया में धान की पसल ही दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा उगाई जाती है. धान की फसल में किसानों को डीएपी डालना पड़ता है. जिसके चलते दुनियाभर के करोड़ों किसान जो धान की खेती करते हैं. उनके लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि कब फसल में डीएपी डाला जाए.

