֍:4500 सैंपलों की होगी जांच§ֆ:प्रदेश के किसानों को लैबों ने फ्री मिट्टी परीक्षण कराने की सुविधा भी उपलब्ध कराएगी. सरकार ने एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने वाले युवाओं और एग्रीकल्चर, हॉर्टीकल्चर सेक्टर में काम करने वाले युवा उद्यमी को ध्यान में रखकर यह पॉलिसी बनाई गई है. जिसमें से एक लैब पर तीन युवा तैनात किए जाएंगे. एक लैब को एक साल में करीब 4500 सैंपल देने का लक्ष्य रखा गया है. जिसके बाद प्रति सैंपल 300 रुपये दिए जाएंगे. इसका मतलब पूरे साल में करीब 13.50 लाख रुपये एक लैब पर सरकार खर्च करेगी. सरकार प्रदेश के सभी 265 लैब पर लगभग 38 करोड़ रुपये एक साल में खर्च करेगी. यदि इससे कम सैंपल आएंगे तो भी सरकार 4500 सैंपल का पैसा युवाओं को भुगतान करेगी. इससे अधिक सैंपल आते हैं तो वह कमाई युवाओं को अलग से होगी.§֍:एक हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार§ֆ:हर लैब पर कम से कम तीन युवाओं को नियुक्त किया जाएगा. ऐसे में ब्लॉक स्तर पर 265 और जिला स्तर पर 55 लैब को मिलाकर करीब एक हजार युवाओं को सीधे रोजगार दिया जाएगा. अगर, 1.25 लाख रुपये भी प्रत्येक लैब पर दिया जाएगा. जिसमें एक युवा को लगभग 25 हजार रुपए महीने की बचत होगी. इनके अलावा फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में काम करने वाली संस्थाएं, कृषक उत्पादक समूह, कृषक उत्पादक कंपनी को भी कुछ लैब पर मिट्टी परीक्षण का काम दिया जाएगा.§֍:सैंपल से किया जाएगा परिक्षण§ֆ:मध्य प्रदेश में हर साल करीब 12 लाख सैंपल परीक्षण के लिए आते हैं. सरकार के कृषि और उद्यानिकी विभाग मिलकर किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा. वहीं बिना मिट्टी परीक्षण किए फसल नहीं लगाए. इसमें विभागों ने मिलकर करीब 15 लाख सैंपल का लक्ष्य तय किया है. योजना में यह भी शामिल किया गया है कि जो युवा लैब पर काम करने के साथ किसानों को सैंपलिंग के लिए प्रोत्साहित करेंगे. उन्हें पुरस्कृत भी किया जाएगा. §मध्य प्रदेश के बीएससी एग्रीकल्चर के छात्रों के लिए खुशखबरी है. मध्य प्रदेश में ब्लॉक स्तर पर मौजूद मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला छात्रों द्वारा संचालित की जाएगी. कृषि और उद्यानिकी की पढ़ाई करने वाले छात्र मिट्टी परीक्षण लैब को चलाएंगे. सरकार ने एग्रीकल्चर के युवाओं को रोजगार देने के लिए छात्रों को सौंपने की तैयारी कर ली है. इतना ही नहीं सरकार इन छात्रों को प्रति लैब 1.25 लाख रुपये महीने की आय वाली गारंटी भी दे रही है.

