֍: गन्ना उत्कृष्टा केंद्र से किसानों को क्या लाभ मिलेगा?§ֆ:केवीके वागपत में एक ऐसा केंद्र शुरु किया जा रहा है, जहां किसानों को अलग-अलग गन्ने की किस्मों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसी के साथ उन्हें गन्ने से जुड़ी नवीनतम तकनीकों के बारे में अवगत करया जाएगा। इसको लेकर हमने अपने केंद्र में गन्ने की ट्राल को शरदकालीन बुवाई से किया था। इसमें हमने गन्ने की सहफसली सरसों के साथ की। इसे लगाने का उद्देश्य किसानों को कम लागत में आय बढ़ाने का तरीका सिखाना था। §֍:केंद्र में गन्ने की कितनी किस्में लगी हैं?§ֆ:वर्तमान में हमने केंद्र पर कई प्रकार की किस्में लगा रखी हैं। इनको हमने एक साथ लगाया है ताकि कृषकों को किस्मों के बीच अंतर करने में आसानी हो। गन्ने की प्रजाती जैसे 0238 जनपद में कई सालों से इस्तेमाल में ली जा रही है। इसकीस तुलना में दूसरी प्रजातियां जैसे को 15023, को 14201, को 713235, को 717231 को हम प्रति स्थापन करके इस्तेमाल कर सकते हैं। पुरानी किस्म को 0118 का उत्पादन 0238 के बराबर ही है लेकिन इन किस्मों में रेडरॉट जैसी समस्या नहीं आती हैं। इन चीजों का ही अध्ययन कराने के लिए हमने कई प्रजातियों को अन्य विधियों से केंद्र में लगाया है। अलग किस्मों के प्रदर्शन से किसान प्रजातियों की पहचान करना सीख जाएंगे। इसमें पत्तियां, फुटाव, कल्ले, बढ़वार, संख्या, बंधाई की आवश्यक्ता जैसी कई चीजें जान सकेंगे। §֍:किन विधियों का इस्तेमाल आपने केंद्र में किया है?§ֆ:केंद्र में अभी हम दो विधियों द्वारा गन्ने की खेती कर रहे हैं। इसमें ट्रेंच विधि और रिंग पिट विधि शामिल है। ट्रेंच विधि में हम दो खूंड के बीच की दूरी को हम दूर लेकर जाते हैं। इसमें एक खूंड से दूसरे खूंड की दूरी 4 से 5 फीट तक होती है। रिंगपिट विधि में हम गोल गड्ढे बनाकर उसके अंदर चक्रनुमा गन्ने के टुकड़ों को 1 से 2 आंख के बराबर बुवाई करते हैं। इस दौरान सिंचाई, उर्वरक हमें गड्ढे के पास ही देना होता है। शुरुआत में हम गड्ढे के अंदर पानी देते हैं, बाद में गड्ढे के चारों तरफ केवल नमी जाती है। इससे पौधे की लगातार वृद्धि होता है। विधियों को देखने के लिए किसान हमारे कृषि विज्ञान केंद्र पर आकर लगातार भ्रमण कर रहे हैं। §֍:क्या केवल किसानों को केंद्र पर आकर प्रदर्शन दिखाया जाएगा?§ֆ:हमारे गन्ना उत्कृष्टा केंद्र पर किसान केवल गन्ने का प्रदर्शन ही नहीं देखेंगे बल्कि इसका पूरा प्रशिक्षण ले सकेंगे। इसमें केवल किसान ही नहीं बल्कि सभी गन्ने से जुड़े लोग यहां आ सकते हैं और प्रशिक्षण के साथ प्रदर्शन का भी लआभ उठा सकते हैं। इससे किसानों के साथ कर्मचारियों को प्रजातियों की पहचान करने में आसानी हो पाएगी। क्योंकि केवल बताने से हम किसी प्रजाति में अंतर नहीं पता लगा सकते हैं। इसके लिए हमें उसे समझने होगा और उनकी विशेषताएं जाननी होंगी। हर किस्म में अपनी अलग-अलग विशेषताएं होती हैं, उन्हें प्रदर्शित करने के लिए हमने कई किस्में लगाई हैं। §֍:एक बार में उत्कृष्टा केंद्र पर कितने किसान आवेदन कर सकेंगे?§ֆ:हम केंद्र में 50-50 लोगों के गुटों में प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इसमें 1, 2 और 3 दिनों के हिसाब से प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेंगे। उसमें हम सभी प्रकार की जानकारी देने का प्रयास करेंगे। जो आप खेती में उत्पादन करते हैं उसके संबंध में भी और खेती के बाद उत्पाद बनाते हैं उसके संबंध में बताएंगे कि कौनसी किस्म के उत्पाद किस प्रकार से अच्छे बन सकते हैं उसके बारे में भी जानकारी दी जाएगी। यदि आप गुड़ बनाते हैं, तो कितना अच्छा होगा। किस किस्म की चीनी की गुणवत्ता ज्यादा अच्छी होगी। उनके बारे में भी किसानों को जानकारी दी जाएगी। §֍:§भारत में गन्ना उत्पादक राज्य की बात करें, तो उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। यहां 23 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन पर गन्ने का उत्पादन किया जाता है। इसके बाद दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र आता है और तीसरे स्थान पर कर्नाटक आता है। इसी के चलते बागपत कृषि विज्ञान केंद्र में गन्ना उत्कृष्टा केंद्र शुरु होने जा रहा है, जो कि किसानों के लिए काफी फायदेमंद होने वाला है। इसी को लेकर केवीके बागपत के गन्ना विशेषज्ञ और गन्ना उत्कृष्टा केंद्र प्रभारी डॉ. विकास कुमार से फसल क्रांति की बातचीत के पेश हैं कुछ मुख्य अंश..

