֍: किन फसलों में पीलीभीत के किसानों को समस्याएं ज्यादा देखने मिलती हैं?§ֆ:पीलीभीत में धान, गेहूं, गन्ना, पीली सरसों और मटर का उत्पादन काफी समय से किया जा रहा है। खेती में हमेशा समस्या आती ही हैं, जिसका निराकरण हमें ही करना है। इन फसलों में से गेहूं की फसल में समस्या अभी तक कुछ खास नहीं देखी गई। हालांकि, खरीफ के समय में धान की फसल जलभराव की स्थिति काफी देखने मिलती है। इस दौरान केवल धान ही नहीं बल्की अन्य फसलें भी नष्ट हो जाती हैं। एक सबसे बड़ी समस्या धान की फसल के साथ ये है कि इसमें जिंक की कमी खेती के दौरान हो जाती है। अगर वे इस दौरान फसल चक्र अपनाएं तो वे पोषक तत्वों की पूर्ती जल्द कर सकते हैं। इसी के साथ किसान दूसरे विकल्पों पर भी जा सकते हैं, जैसे मक्का की खेती। मक्का का क्षेत्र अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है। §֍:किसानों को खेती के दौरान किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है?§ֆ:किसानों को खेती में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इसमें अगर धान की खेती की बात करें तो किसान फसल की कटाई कंबाइन हार्वेस्टर से कराते हैं। ऐसे में किसानों को खेत में मौजूद फसल अवशेषों को जलाना पड़ता है। लेकिन, अब वैज्ञानिकों ने हैप्पीसीडर और सुपरसीडर जैसी मशीने बाजार में उपलब्ध करा दी हैं, जो कि इस समस्या को काफी हद तक ठीक कर रहा है। अब यहां के किसान हैप्पीसीडर और सुपरसीडर से गेहूं की बुवाई कर रहे हैं। §֍:कम लागत में अधिक उत्पादन किसानों के लिए क्यों चुनौती बन गया है? §ֆ:कम लागत में अधिक उत्पादन निकालना ही किसानों के लिए सबसे कठिन चुनौती है। इसमें सबसे बड़ी समस्या मजदूरों को लेकर आती है। धान की रोपाई, सिंचाई करने में काफी ज्यादा पैसा लगता है। ऐसे में अगर किसान वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई विधि का उपयोग करें तो उन्हें खेती में काफी मदद मिलेगी. दूसरी समस्या ये कि पीलीभीत तराई का क्षेत्र है. ऐसे में जलभराव की समस्या काफी देखी जाती है, जिसमें फसलें नष्ट भी हो जाती हैं. इस वजह है यहां किसान मोटा धान लगाते हैं. इसके दाम बाजार में काफी कम हैं. इसीलिए हम किसानों को सुझाव देते हैं कि बासमति या उससे ऊपर की किस्मों की खेती करें. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और कम लागत में ज्यादा मुनाफा होगा. बासमति धान का उत्पादन काफी ज्यादा हो जाता है और इसमें कीड़े लगना जैसी बीमारियों की समस्या कम से कम आती है. बासमति धान में किसान प्रकृतिक खेती भी कर सकते हैं. इसकी कुछ किस्में ऐसी आ गई हैं, जैसे हम पूसा 1509 की बात करें तो यह फसल 100 से 110 दिनों में बढ़ जाती है. §֍:आप किस धान की किस्म पर कार्य कर रहे हैं?§ֆ:कृषि विज्ञान केंद्र, पीलीभीत में हमने करीब 19 एकड़ में पंत धान 26 का बीज उत्पादन प्रोग्राम किया जा रहा है. इसको लेकर अभी खेत में यूरिया छिड़काव किया जा रहा है. किसान भाई को हम इसको लेकर सलाह देना चाहेंगे कि किसान ज्यादा से ज्यादा खेत में उर्वरक का उपयोग करते हैं. वे खेत में डीएपी, सल्फर, नाइट्रोजन जैसी कई चीजें डाल देते हैं. ऐसे में हमारा कहना है कि खेत में उर्वरक ज्यादा से ज्यादा डालने पर कुछ खेस असर नहीं होगा. इसके बजाए किसान फसल की दक्षता बढ़ाने पर ध्यान दें. इससे फसल का उत्पादन बढ़ेगा साथ ही लागत में कमी आएगी. इसके लिए किसान केवीके में संपर्क कर सकते हैं.§֍:फसल क्रांति की ओर से किसानों को क्या संदेश देना चाहेंगे?§ֆ:किसानों के लिए हमारा हमेशा से सुझाव रहा है कि उनको अपनी लागत कम करने पर ध्यान देना चाहिए. फसल को जिस चीज की जरूत हो, किसान वही चीज खेत में लगाएं. दूसरा सुझाव है कि किसान एकीकृत कृषि प्रणाली की ओर आगे बढ़ें. जिसमें किसान एक ही खेत में कई फसलों को कर सकते हैं. साथ ही किसान पशु पालन के साथ मधुमक्खी पालन और मशरूम जैसी फसलों का एकीकरण करके किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. साथ ही मक्का की खेती में भी किसान आगे बढ़ सकते हैं. हमारा कहना ये है, कि किसान एक फसल पर न रहकर कम से कम 3-4 फसलों पर जाएं. इससे उन्हें कम लागत में अधिक मुनाफा मिलेगा. इसी के साथ धान के पुआल किसान किसी भी हालत में न जलाएं. इसके लिए बेलर मशीन आ गई है, जिससे किसान पैसे भी कमा सकते हैं.§कृषि विज्ञान केंद्र भारत में किसानों कृषि विस्तार करने में मदद करते हैं। आमतौर पर एक स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय के साथ जुड़े हुए ये केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और किसानों के बीच कार्य करते हैं। केवीके किसानों को फसल की सुरक्षा, नई तकनीकें और कई समस्याओं के समाधान के साथ फसलों और पशुपालन जैसे कई प्रसिक्षण भी देते हैं।

