ֆ:66 साल की कक्षा 10 पास ये काकी जब साइकिल से चला कर आती हैं तो लोगो को देख के हंसी आती है, पर आप को ये बता दूं ये कोई साधारण महिला नहीं है बल्कि इस वर्ष पद्मश्री जैसे बड़े सम्मान से सम्मानित बिहार की श्रीमती राजकुमारी देवी हैं।
राजकुमारी देवी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सरैया ब्लॉक के ग्राम आनंदपुर की निवासी हैं। मात्र 15 साल की उम्र में राजकुमारी देवी का विवाह इस ग्राम में एक किसान के साथ हुआ था। जिसको खेती के नाम पर सिर्फ तम्बाकू उगाना आता था। जमीन भी कम था जिससे घर का खर्च ठीक से नहीं चल पाता था। घर ठीक से न चलने के कारण परिवार खिन्न रहने लगा।
राजकुमारी बताती हैं कि इन सभी परेशानियों के बीच औलाद न होने की वजह से भी लोगों के अनेक अत्याचार सहने पड़े। शादी के नौ साल बाद भी राजकुमारी की गोद सूनी थी इस कारण उनको बहुत अत्याचार झेलने पड़े। इनको घर से निकाल तक दिया गया।
काफी मान मनौवल के बाद आखिरकार इनको फिर से घर में जगह मिली। अब की बार राजकुमारी देवी ने हार न मानने की कसम खाकर घर में पुनः प्रवेश किया था। आखिरकार किसी प्रकार दु:ख झेलते हुए इन्होंने खुद खेती शुरू की और जो भी उपज हुई उससे अचार और मुरब्बे बनाये। अचार और मुरब्बा बनने के बाद बेचने की चुनौती सामने आई। इन्होंने बहुत से लोगों को पारितोषिक पर अपने हाथ से बने अचार और मुरब्बा बेचने का ऑफर किया मगर कोई इन उत्पाद को बेचने के लिए तैयार नहीं हुआ। इन सब के बावजूद भी राजकुमारी ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने खुद साइकिल सीखने की ठानी। अंत में वो दिन भी आया जब ये साइकिल चलाने लगी और अपने हाथ से बने अचार और मुरब्बे को दुकान-दुकान बेचने लगीं। धीरे-धीरे गृहस्थी की गाड़ी चलने लगी।
अचार और मुरब्बे से आमदनी होता हुआ देख राजकुमारी को लगा कि यदि और अच्छे ढंग से ये काम किया जाय तो बेहतर मूल्य मिल सकता है और इस क्षेत्र में अच्छा पैसा कमाया जा सकता है।
अचार और मुरब्बे को बेहतर तरीके से बनाके के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है ये बात राजकुमारी देवी को पता था इसलिए उन्होंने पूसा कृषि विश्वविद्यालय का रुख किया और खेती तथा फूड प्रोसेसिंग का वाकायदा प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने खेती में जल्दी फसल देने वाली चीजें उगाईं खासकर पपीता आदि।
राजकुमारी को अचार मुरब्बे आदि से अच्छी इनकम हुई और काम बढा तो उन्होंने अनेक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर अपने साथ मिला लिया। धीरे-धीरे उनको सफलता मिलती चली गई और उनका नाम बढ़ता गया।
सबसे पहले बिहार के मुख्यमंत्री लालू यादव ने सरैया मेले में उनको वर्ष 2003 में सम्मानित किया फिर नीतीश कुमार खुद उनके घर गए और उनके कार्यो का जायजा लेकर वर्ष 2007 में ‘किसानश्री’ से सम्मानित किया । ये पुरस्कार पहली बार किसी महिला को मिला था। लोग उनको ‘किसान चाची’ कहने लगे।
अमिताभ बच्चन के एक शो कौन बनेगा करोड़पति में भी राजकुमारी देवी आमंत्रित हुईं थीं। शो के बाद उनको एक आटा चक्की 5 लाख रुपये और साड़ियां उपहार स्वरूप मिलीं।
राजकुमारी देवी जी आज स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं। कभी अकेली खेतों में काम करने वाली महिला आज हज़ारों को उनके पैरों पर खड़ा कर रही हैं। सरकार ऐसे लोगों को ऋण अनुदान देने के लिए पूरी तरह तत्पर है । बस ईमानदारी और इच्छाशक्ति की जरूरत है।
§फसल क्रांति के इस अंक में हम आपको एक ऐसी महिला किसान के बारे में बताने जा रहे हैं जिसको शायद कम लोग ही जानते होंगे। हालांकि इनका नाम प्रधानमंत्री मोदी से लेकर महानायक अमिताभ बच्चन तक जानते हैं। 66 वर्षीय इस महिला किसान की कहानी से हर कोई प्रभावित होता है।

