ֆ:इस कार्यक्रम की शुरुआत में केंद्र के अध्यक्ष डॉ डी.के. राणा ने सभी का स्वागत करते हुए केंद्र की गतिविधियां के बारे में बताते हुए केचुआ खाद की उपयोगिता एवं जैविक कृषि के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
दस दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षण संचालक बृजेश यादव (मृदा विज्ञान) ने प्रशिक्षुकों को केंचुआ खाद में उपयोग, जैविक खेती केचुआ खाद का महत्व, केचुआ खाद बनाने में आने वाली प्रजातियां, केंचुआ खाद उत्पादन के लिए जगह का चुनाव वर्मी बेड के निर्माण करने की विधियां, बैड में कार्बनिक पदार्थो कों चरणबद्ध तरीके से भराव एवं रखरखाव एवं सावधानियां के साथ विस्तृत जानकारी सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक रुप से अवगत करवाया।
इसी प्रशिक्षण के दौरान डॉ समरपाल सिंह ने प्रायोगिक रुप से विभिन्न जैविक उत्पाद जैसे पंचगव्य, जीवामृत, वर्मीवास आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी। राकेश कुमार, बागवानी विशेषज्ञ नें केंचुआ खाद का परिनगरीय क्षेत्र में बागवानी में विशेष योगदान के बारे में जानकारी से अवगत करवाया।
डॉ जय प्रकाश विशेषज्ञ (पशु विज्ञान) न प्रशिक्षुकों को बायोगैस एवं बायोस्लरी का जैविक खेती में महत्व के साथ विस्तृत जानकारी दी एवं डॉ ऋतु सिंह (गृह विज्ञान) बाजार में वर्मीकम्पोस्ट के वितरण, उच्चग गुणवत्ता युक्त पैकिंग एवं उत्पाद के विज्ञापन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
कैलाश, विशेषज्ञ (प्रसार) ने केचुआ खाद हेतु अनुदान एवं योजनाओं के जानकारी देते हुए केन्द्र के संचार माध्यम एवं डिजिटल प्लैटफ़ॉर्म के बारे में जागरुक किया। राम सागर ने वर्मीकम्पोस्ट का फसलों में अनुप्रयोग के बारे में अवगत करवाया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तिम दिन प्रशिक्षुकों मूल्याकंन एवं प्रतिक्रिया दर्ज की गई।
§कृषि विज्ञान केन्द्र, दिल्ली के द्वारा केंचुआ खाद उत्पादन तकनीकी विषय पर व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 05 अगस्त से 14 अगस्त के बीच किया गया। इस प्रशिक्षण के अंतर्गत दिल्ली व आसपास के 25 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया।

