֍:किसानों को होगा फायदा§ֆ:कंवर पाल ने बताया कि पिछले वर्ष राज्य में मधुमक्खी पालकों ने 5000 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन किया था, जिसकी बाज़ार में करीब 55 करोड़ रुपये कीमत है. कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मधुमक्खी पालकों को शहद एकत्रित करने तथा इस व्यवसाय से संबंधित अन्य उपकरणों को खरीदने पर लागत में 80 प्रतिशत की सब्सिडी मिलेगी. किसानों की डिमांड होती थी कि मधुमक्खी पालन के उपकरण बाज़ार में या तो मिलते नहीं, अगर मिलते हैं तो महंगी दरों पर निम्न क्वालिटी के मिलते हैं जिससे उनकी आमदनी पर असर पड़ रहा है.
§֍:कहां मिलेंगे सस्ते उपकरण §ֆ:कृषि मंत्री ने बताया कि कुरुक्षेत्र जिले के रामनगर में इजराइल और भारत सरकार का “एकीकृत मधुमक्खी विकास केंद्र” स्थापित किया गया है, जिसमें किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए ट्रेनिंग और अन्य जानकारी दी जाती है. उन्होंने बताया कि किसानों की समस्या को समझते हुए प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि इसी केंद्र में कुछ निर्धारित दरों की दुकानें शुरू की जाएं जहां पर मधुमक्खी पालन के उपकरण आसानी से उपलब्ध हो सकें.
§֍:किन उपकरणों की होती है जरूरत §ֆ:यहां पर बी-बॉक्सेस, बी-टूल किट, बी-ब्रश, बी-ग्लॉव्स, बी-फीडर, रानी मक्खी का पिंजरा, शहद निकालने की मशीन समेत अन्य उपकरण उपलब्ध होंगे. ये उपकरण अब किसानों को सस्ती दरों पर मिलेंगे. किसानों का कहना है कि यह सब उपकरण जगह-जगह उपलब्ध होने चाहिए. कृषि मंत्री की अध्यक्षता में हुई हाई पॉवर परचेज कमेटी की बैठक में करीब 6.5 करोड़ रुपये की लागत के उपकरणों के टेंडर फाइनल किए गए. बैठक में कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजा शेखर वुंडरू, निदेशक राजनारायण कौशिक, वित्त विभाग के विशेष सचिव जयबीर सिंह आर्य और बागवानी निदेशालय के विशेष विभागाध्यक्ष अर्जुन सिंह सैनी मौजूद रहे.
§अब हरियाणा में मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों को इस काम से संबंधित उपकरण सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगे. प्रदेश सरकार ने इन उपकरणों की दरें तय कर दी हैं. हाई पॉवर परचेज कमेटी की बैठक में करीब 6.5 करोड़ रुपये की लागत वाले उपकरणों की दरें तय की गई. यह किसानों की लंबे समय से मांग चली आ रही थी कि मधुमक्खी पालन में काम आने वाले उपकरणों की गुणवत्ता और दरें निर्धारित की जानी चाहिए. हाई पॉवर परचेज कमेटी के चेयरमैन एवं कृषि मंत्री कंवर पाल ने बताया कि राज्य में पिछले 10 वर्षों में मधुमक्खी पालन का व्यवसाय तेजी से बढ़ा है. कई किसानों ने इस व्यवसाय को अपनाकर कृषि-विविधीकरण की तरफ कदम बढ़ाया है जो कि कृषि-जोत कम होने पर यह अच्छी पहल है.

