֍:मशीनें होंगी अपग्रेड§ֆ:काजू सम्मेलन को संबोधित करते हुए देव ने कहा कि मशीनरी को अपग्रेड करने के लिए वित्तीय सहायता सराकार द्वारा प्रदान की जाएगी. मशीनों को अपग्रेड करने की सख्त जरूरत है और हमारी वित्तीय सहायता योजना के माध्यम से हमें उम्मीद है कि उद्योग कुछ हद तक खुद को आधुनिक बनाने के लिए फंड का उपयोग भी करेगा. एपीडा के निदेशक तरुण बजाज ने कहा कि काजू निर्यातकों को 2 करोड़ के स्लैब के साथ मशीनरी लागत पर 40 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जाएगी. इससे निर्यात में वृद्धि भी होगी. साथ ही इसकी जरूरत भी है.§֍:निर्यात भारी गिरावट§ֆ:भारत से काजू के निर्यात को लेकर देव ने कहा कि 2017-18 में लगभग 917 मिलियन डॉलर से गिरकर काजू का निर्यात 2023-24 में लगभग 368 मिलियन डॉलर रह गया. एक समय ऐसा था, जब हम वैश्विक निर्यात का लगभग 80 प्रतिशत निर्यात कर रहे थे. अब हम हमारी हिस्से दारी लगभग 8 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि एपीडा इस क्षेत्र के विकास के लिए क्लस्टर आधारित एप्रोच पर विचार कर रहा है. क्लस्टर आधारित एप्रोच के लिए एकीकृत विकास को के लिए केरल के कोल्लम और महाराष्ट्र के चांदगढ़ में दो स्थानों की पहचान की गई है, जो एपीडा उद्योग को काजू के निर्यात को बढ़ावा देने में मदद करेगा. §भारत में किसान काफी अधिक मात्रा में काजू की खेती करते हैं. अब इसके निर्यात में काफी गिरावट देखी जा रही है. जिसके चलते सरकार ने कई उपायों की घोषणा की है. सरकार ने काजू के लिए प्रोसेसिंग मशीनरी को अपग्रेड करने के लिए सब्सिडी देने वाली है. साथ ही विदेशों में कमोडिटी की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए सहायता भी करेगी. इसको लेकर कृषि प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और उत्पाद विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा, ”काजू हमारे फोकस प्रोडक्ट्सं में से एक है और हम इस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास को आगे बढ़ाएंगे. हम काजू निर्यात को सबसे अधिक महत्व दे रहे हैं.”

