֍:किसानों के लिए नया उपाय §ֆ:इसे फसलों एवं सब्जियों में विभिन्न रोगों एवं कीटों की रोकथाम के लिए प्राकृतिक रोग रोधक एवं जैव कीटनाशक के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है. इन वैज्ञानिकों का दावा है कि इसके प्रयोग से 10-15 फीसदी तक उत्पादन बढ़ जाता है. इससे उपज पर किसी तरह का दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता.
§֍:जानें क्या है वर्मीवाश §ֆ:
आईए अब जानते हैं कि वर्मीवाश है क्या. इन तीनों वैज्ञानिकों ने बताया है कि वर्मीवाश एक लिक्विड जैविक खाद है. यह केंचुओं द्वारा स्रावित हार्मोन, पोषक तत्वों एवं एंजाइमयुक्त होती है. इसमें रोगरोधक गुण और पोषक तत्व घुलनशील रूप में उपस्थित होते हैं और पौधों को आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं. इसमें घुलनशील नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश मुख्य पोषक तत्व होते हैं. इसके अलावा इसमें हार्मोन जैसे ऑक्सीजन एवं साइटोकाइनिन, विटामिन, अमीनो अम्ल और विभिन्न एंजाइम जैसे-प्रोटीएज, एमाइलेज, यूरीएज एवं फॉस्फेटेज भी पाए जाते हैं.
§फसलों के उत्पादन में वर्मीवाश की खास अहमियत है. आज कई राज्यों में वर्मीवाश का इस्तेमाल किसान कर रहे हैं. अब वर्मीवाश के इस्तेमाल से फसलों के उत्पादन को बढ़ाया जा सकेगा. रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के तौर पर प्रयोग की जा रही केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) से ही वर्मीवाश तैयार किया जाता है. से किसान कम लागत में तैयार कर सकते हैं. कृषि वैज्ञानिकों की एक रिपोर्ट में इसे पर्यावरण हितैषी बताया गया है. इसके उपयोग से किसान उत्तम गुणवत्तायुक्त उपज प्राप्त कर सकते हैं.

